
बिहार का पहला फिश ब्रूड बैंक (मछलियों का बीज बैंक) सीतामढ़ी जिले में बनकर तैयार हो चुका है. इसके बनने के बाद जहां मछली पालकों को बेहतर क्वालिटी वाला मछली बीज आसानी से उपलब्ध होगा, वहीं अब उन्हें मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी. राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सीतामढ़ी जिले के बखरी में करीब 40 एकड़ में बने फिश ब्रूड बैंक का शुभारंभ 8 अगस्त को करेंगे. सरकार का मानना है कि फिश ब्रूड का उत्पादन शुरू हो जाने से हैचरी चलाने वालों को राज्य में सस्ती दर पर अच्छी क्वालिटी का प्रजनक मछली बीज उपलब्ध हो सकेगा.
सीतामढ़ी जिले में ब्रूड बैंक का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया था. फिश ब्रूड बैंक का निर्माण प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत किया गया है, जिसकी लागत करीब 10.92 करोड़ रुपये आई है. इस ब्रूड बैंक में आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से स्वस्थ, बड़े और आनुवंशिक रूप से उन्नत मछलियों (ब्रूडर्स) के बीज को तैयार किया जाएगा, ताकि उनसे गुणवत्तापूर्ण और रोग-मुक्त बीज तैयार किया जा सके. हालांकि, पहले बिहार के हैचरी संचालक प्रजनक मछलियां और मत्स्य बीज नदी, जलाशयों जैसे प्राकृतिक स्रोतों से लाते थे. इनमें कई तरह के दोष होते थे और इसके चलते मछलियों की वृद्धि कम होती थी. इन मछलियों की मृत्यु दर अधिक होती थी.
आज से करीब तीन दिन बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ब्रूड बैंक का लोकार्पण करेंगे. वहीं, सीतामढ़ी के डुमरा अंचल स्थित राघोपुर बखरी में स्थापित फिश ब्रूड बैंक राज्य में नई नीली क्रांति का केंद्र बनने जा रहा है. इसके शुरू होने के साथ ही यह ब्रूड बैंक लोगों को रोजगार के साथ-साथ बेहतर आर्थिक संबल भी प्रदान करेगा. वहीं, 40 एकड़ में तैयार इस ब्रूड बैंक में कई बड़े ब्रूड स्टॉक तालाब, नर्सरी पॉन्ड और रियरिंग पॉन्ड बनाए गए हैं. साथ ही केंद्र पर मत्स्य बीज हैचरी की भी स्थापना की गई है, जिससे मत्स्य पालकों को गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी.
बिहार के पहले फिश ब्रूड बैंक में मुख्य रूप से भारतीय मेजर कार्प—रोहू, कतला, मृगल, जयंती रोहू, कॉमन कार्प, अमृत कतला, अमूर कार्प के साथ-साथ मछलियों की अन्य प्रजातियों के बीज उपलब्ध होंगे. साथ ही किसानों को स्थानीय स्तर पर सस्ता और शुद्ध बीज उपलब्ध होने से न सिर्फ मछली उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा. साथ ही बाहरी राज्यों पर मत्स्य बीज की निर्भरता में कमी आएगी. वहीं, आने वाले दिनों में यह फिश ब्रूड बैंक मिट्टी जांच, पानी जांच, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा.