सूरजमुखी की खेती करने का तरीका और बुवाई का सही समयअधिकतम औसत तापमान के मामले में फरवरी की गर्मी ने पिछले 146 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. वहीं 2023 का फरवरी महीना 1877 के बाद सबसे ज्यादा गर्म महीना रहा है. लेकिन अब मार्च का महीना शुरू हो चुका है. इस दौरान अगेती सरसों की कटनी, दौनी शुरू हो चुकी है. साथ ही आलू की खुदाई होने के बाद से खेत खाली है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर कोई किसान खाली खेतों में दलहन, तिलहन की खेती करना चाहते हैं, तो वह अपने खेतों में सूरजमुखी, ज्वार, स्वीट ज्वार, हाइब्रिड मेथी या बोरी फसल की खेती कर सकते हैं. इसके साथ ही गरमा मूंग और उड़द की बुवाई भी कर सकते हैं. ग्रामीण कृषि मौसम सेवा डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर की ओर जारी साप्ताहिक मौसम रिपोर्ट के अनुसार, होली यानी आठ मार्च तक अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है. वहीं बीते महीने में सामान्य से ज्यादा तापमान होने से सूबे में सब्जी, आम, लीची, गेहूं और जौ सहित अन्य फसलों पर सीधा असर देखने को मिला है. इसके साथ ही सितंबर महीने के बाद से अभी तक बारिश नहीं होने से फसल से लेकर बागवानी की फसलों पर प्रभाव देखने को मिल रहा है.
कृषि विज्ञान केंद्र कैमूर में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक अमित कुमार सिंह ने बताया कि जिन किसान भाइयों के खेत आलू एवं अगेती सरसों की कटाई के बाद खाली हैं. वे किसान दलहन व तिलहन की खेती कर सकते हैं. इसमें विशेष रूप से तिलहन के लिए सूरजमुखी की खेती उपयुक्त है. दस मार्च तक किसान सूरजमुखी की खेती कर सकते हैं. इस समय अवधि में खेती करने के दौरान किसान अधिक उपज ले सकते हैं. इसके लिए उन्नत किस्म के बीजों का चयन करें, जिसमें विद्या मुखी, सूरजमुखी,ज्वालामुखी, के.बी.एस.एच-1, के.बी.एस.एच-44, एम.एस.एफ.एच-1, एम.एस.एफ.एच-8 सहित का चयन कर सकते हैं. वहीं संकर किस्मों के लिए बीज दर 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा संकुल किस्मों में के लिए 8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें.
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कृषि वैज्ञानिक अमित कुमार सिंह कहते हैं कि सूरजमुखी की बुआई के करीब 8 दिन पहले किसान प्रति हेक्टेयर 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर कम्पोस्ट खाद के साथ खेत की जुताई करें. बीज की बुआई के दौरान 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 30 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर खाद का उपयोग करना चाहिए. वहीं बीज की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर एवं लाइन की दूरी 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए. किसान भाई जमीन की नमी बनाए रखने के लिए 10 से 15 दिन पर सिंचाई करें. फसल में दाना बनने के दौरान रुमाल लपटे हुए हाथ से दाने को सहलाना चाहिए. इस प्रक्रिया से फसल उत्पादन में इजाफा होगा. वहीं यह कार्य सुबह के 10 बजे से पहले करना चाहिए.
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अगर किसान एक हेक्टेयर में सूरजमुखी की खेती करता है. तो प्रति हेक्टेयर करीब 30 हजार रुपये तक खर्च आता है. वहीं प्रति हेक्टेयर करीब 25 से 30 क्विंटल तक फूल निकलते है. वहीं बाजार में 4 हजार प्रति क्विंटल तक भाव से बिकता है.
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