केरल में कमजोर पड़ा मॉनसूनकेरल में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार कमजोर पड़ गई है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस मॉनसून सीजन में अब तक सामान्य से 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. इस बीच, कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ने लगी है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है.
IMD की प्रभारी निदेशक वी.के. मिनी के अनुसार, अभी तक केरल के सिर्फ चार जिलों तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में सामान्य बारिश दर्ज की गई है. हालांकि, अगर आने वाले दिनों में बारिश की कमी जारी रहती है तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की श्रेणी में आ सकते हैं. मौसम विभाग के नियमों के मुताबिक, किसी जिले में सामान्य से 19 प्रतिशत से ज्यादा बारिश की कमी होने पर उसे बारिश की कमी वाला जिला माना जाता है. मौजूदा स्थिति में केरल के कई जिले इस मानक के करीब पहुंच चुके हैं.
कम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है. बारिश पर निर्भर खेती वाले क्षेत्रों में किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. कम बारिश के कारण मिट्टी में नमी की कमी हो रही है, जिससे बुवाई में देरी हो सकती है. कृषि विभाग किसानों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने और खेती में जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दे रहा है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल अल नीनो की स्थिति का असर मॉनसून पर पड़ रहा है. सामान्य तौर पर जून महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर कई कम दबाव वाले क्षेत्र और डिप्रेशन बनते हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करने में मदद करते हैं. लेकिन इस साल जून में अब तक बंगाल की खाड़ी के ऊपर कोई डिप्रेशन नहीं बना है.
वी.के. मिनी ने बताया कि आमतौर पर केरल में जून और जुलाई-अगस्त के दौरान कई मॉनसूनी सिस्टम बनते हैं, जो राज्य में अच्छी बारिश लाते हैं. लेकिन अल नीनो की वजह से इन सिस्टम के बनने की संभावना कम हो रही है, जिसका असर बारिश पर दिखाई दे रहा है.
केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप से 'तिरुवथिरा न्जाट्टुवेला' कहा जाता है. इस दौरान किसान पौधरोपण और धान की बुवाई जैसे काम करते हैं, क्योंकि यह समय आमतौर पर मॉनसून की अच्छी बारिश का दौर होता है. लेकिन इस बार कमजोर मॉनसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. अगर बारिश की कमी लंबे समय तक जारी रहती है तो भूजल स्तर में गिरावट और पीने के पानी की समस्या भी पैदा हो सकती है.
मौसम विभाग ने अन्य विभागों को सलाह दी है कि वे कम बारिश के संभावित प्रभावों को देखते हुए समय रहते जरूरी कदम उठाएं. IMD ने पहले ही इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर अल नीनो के असर के कारण सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई थी, अब किसानों और प्रशासन दोनों की नजर आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी हुई है. (PTI)
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