देश के कई राज्यों में सूखे जैसे हालातमौसम विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को इस साल के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए अपना पहला दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया था. संसद में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उस समय विभाग ने सामान्य से थोड़ा कम, यानी दीर्घकालिक औसत (LPA) की करीब 92 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया था. बाद में दूसरे चरण के पूर्वानुमान में इसे अपडेट करके LPA का 90 प्रतिशत कर दिया गया और साथ ही प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने का अंदेशा भी जताया गया. यह अंदेशा बिल्कुल सही साबित हुआ और जून के महीने में देश भर में सामान्य से लगभग 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई.
जून में देश के 70 प्रतिशत जिलों में पानी की भारी किल्लत देखी गई. हालांकि बाद के हफ्तों में मौसम में कुछ सुधार देखने को मिला, फिर भी 2 अगस्त 2026 तक पूरे देश में हुई कुल संचयी मौसमी बारिश LPA से करीब 12 प्रतिशत कम रही है. यह कमी मौसमी उतार-चढ़ाव के बावजूद मौसम विभाग के शुरुआती अनुमानों के काफी करीब दिखाई देती है.
संसद में दिए गए आंकड़ों और 5 अगस्त 2026 तक के संचयी वर्षा रिकॉर्ड के अनुसार, देश के 16 इलाकों में सामान्य से 20 प्रतिशत से लेकर 38 प्रतिशत तक बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है. मुख्य रूप से बिहार 38%, अरुणाचल प्रदेश 36%, असम और मेघालय 35%, तटीय आंध्र प्रदेश व यानम 35%, लक्षद्वीप 33%, पंजाब 33%, रायलसीमा 32%, पूर्वी उत्तर प्रदेश 30% और झारखंड 30% में बहुत कम पानी बरसा है.
इसके अलावा हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली 26%, केरल 22%, पूर्वी मध्य प्रदेश 22%, पूर्वी राजस्थान 22%, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा 21%, तटीय कर्नाटक 21% और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक 20%में भी बारिश की भारी किल्लत दर्ज की गई है. कम बारिश वाले इन तमाम क्षेत्रों में फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और जल भंडारण में कमी आने का बड़ा अंदेशा है. यह पूरी जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी गई.
पूर्वानुमान के मुताबिक जून 2026 में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में एक कमजोर अल नीनो विकसित हुआ और जल्द ही यह मध्यम तीव्रता तक पहुंच गया इसने देश भर में मॉनसूनी हवाओं के स्वाभाविक बहाव में बड़ी रुकावट डालने का काम किया. अल नीनो के इस नकारात्मक प्रभाव के कारण ही अगस्त की शुरुआत तक देश में 12 प्रतिशत की कुल बारिश की कमी रही और लगभग 47 प्रतिशत जिले इससे सीधे प्रभावित हुए.
अल नीनो के चलते कई इलाकों में लंबे समय तक सूखा मौसम बना रहा, जिससे स्थानीय स्तर पर मौसम संबंधी सूखा, मिट्टी में नमी की भारी कमी और जल भंडारों के जलस्तर में गिरावट जैसी बड़ी समस्याएं पैदा हो गईं. इससे मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहने वाली खरीफ फसलों पर नमी का भारी तनाव बन गया है. मौसम विभाग इस स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और केंद्र और राज्य सरकारों को जरूरी सलाह और उप-विभागीय अलर्ट जारी कर रहा है ताकि आपदा तैयारियों और कृषि नियोजन को सही दिशा दी जा सके.
मौसम का मिजाज जुलाई के महीने में थोड़ा बदला जरूर, लेकिन इसने राहत देने के साथ-साथ एक बड़ी भौगोलिक असमानता भी पैदा कर दी. जुलाई के दौरान, खासकर 15 जुलाई के बाद, मध्य भारत के कई हिस्सों में बहुत तेज और मूसलाधार बारिश दर्ज की गई. इस भारी बारिश के चलते पूरे देश का जुलाई महीने का बारिश का कुल आंकड़ा बढ़कर LPA से 1 प्रतिशत अधिक हो गया. लेकिन इस राहत के बावजूद एक कड़वी हकीकत बनी रही कि देश के करीब 47 प्रतिशत जिलों में बारिश की कमी या अत्यधिक कमी झेलनी पड़ी.
मध्य भारत को छोड़कर कई प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में 15 जुलाई के बाद भी अच्छी बारिश न होने से किसान बेहद परेशान और हताश नजर आ रहे हैं. धान और अन्य फसलों की बुआई में देरी हो रही है या खड़ी फसलें पानी की कमी के कारण सूखने की कगार पर हैं. मॉनसून के इस असंतुलन ने खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की चिंता को बहुत बढ़ा दिया है.
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