अल नीनो को लेकर बड़ा अपडेट (सांकेतिक तस्वीर)वैश्विक मौसम एजेंसी वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने संकेत दिया है कि मौजूदा ला नीना की स्थिति धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है और वर्ष 2026 के आगे बढ़ने के साथ अल नीनो बनने की संभावना बढ़ सकती है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल मध्य-2026 तक ENSO न्यूट्रल स्थिति रहने की संभावना है, लेकिन इसके बाद समुद्री सतह के तापमान में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं.
ENSO यानी अल नीनो-सदर्न ऑस्सीलेशन की स्थिति प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री तापमान और वायुमंडलीय परिसंचरण के बदलाव से तय होती है. जब समुद्र की सतह असामान्य रूप से गर्म हो जाती है, तब अल नीनो की स्थिति बनती है. इसके साथ ही हवा के रुख, दबाव और बारिश के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिलता है.
बिजलेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, WMO ने अपने ताजा अनुमान में कहा है कि मार्च से मई 2026 के दौरान ENSO न्यूट्रल स्थिति बने रहने की संभावना लगभग 60 प्रतिशत है. यह संभावना अप्रैल से जून के बीच बढ़कर करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. वहीं, मई से जुलाई के दौरान न्यूट्रल स्थिति की संभावना करीब 60 प्रतिशत आंकी गई है, जबकि अल नीनो बनने की संभावना लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है.
हालांकि, मौसम एजेंसियों का कहना है कि इतने लंबे समय के पूर्वानुमान में अनिश्चितता भी काफी रहती है. इसकी मुख्य वजह "बोरियल स्प्रिंग प्रेडिक्टेबिलिटी बैरियर" नाम की जलवायु सीमा है, जिसके कारण उत्तरी गोलार्ध के वसंत महीनों में ENSO का पूर्वानुमान लगाना कठिन हो जाता है. इस दौरान समुद्र और वायुमंडल के बीच तालमेल कमजोर पड़ जाता है, जिससे मॉडल की सटीकता कम हो जाती है.
अल नीनो का असर भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर देखा जाता है. आमतौर पर अल नीनो की स्थिति बनने पर भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा रहता है. इससे कृषि उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है.
इसका उदाहरण 2023 में देखने को मिला था, जब जून में शुरू हुआ अल नीनो करीब 11 महीनों तक सक्रिय रहा. उस दौरान धान और दालों जैसे प्रमुख खाद्यान्नों का उत्पादन प्रभावित हुआ था, जिसका असर खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर भी पड़ा.
कुछ अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का मानना है कि आने वाले समय में अल नीनो के साथ हिंद महासागर डाइपोल (IOD) के सक्रिय होने की भी संभावना बन सकती है. अगर ऐसा होता है तो वैश्विक बारिश पैटर्न, तापमान और जलवायु से जुड़े कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
WMO ने कहा है कि मार्च से मई 2026 की अवधि के लिए दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक भूमि तापमान का संकेत मिल रहा है. वहीं, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में अभी भी ला नीना जैसे संकेत बने हुए हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में बारिश के संकेत साफ और एक समान नहीं हैं.
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