महाराष्ट्र में कमजोर पड़ सकता है मॉनसून, किसानों को विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र

महाराष्ट्र में कमजोर पड़ सकता है मॉनसून, किसानों को विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र

एल नीनो के असर से इस साल महाराष्ट्र में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग ने खासकर पश्चिम विदर्भ और मराठवाड़ा में कम बारिश का अनुमान जताया है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को घबराने के बजाय सही समय पर बुवाई, पानी बचाने और कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह दी है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.

Advertisement
महाराष्ट्र में कमजोर पड़ सकता है मॉनसून, किसानों को विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्रमहाराष्ट्र में घट सकती है बारिश

महाराष्ट्र में इस साल मानसून को लेकर चिंता बढ़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार एल नीनो के असर से राज्य में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. अनुमान है कि इस बार महाराष्ट्र में करीब 88 प्रतिशत ही बारिश हो सकती है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि पश्चिम विदर्भ और मराठवाड़ा के इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है. कम बारिश की खबर सुनकर किसान चिंता में हैं, क्योंकि खेती का काम बारिश पर ही निर्भर करता है.

डरने की नहीं, समझदारी से काम करने की जरूरत

अकोला के डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के सेवानिवृत्त पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष तले ने किसानों को घबराने से मना किया है. उन्होंने कहा कि एल नीनो पहले भी कई बार आया है और किसान हर बार इसका सामना करते आए हैं. उन्होंने कहा कि इस बार किसानों को खेती करने का तरीका थोड़ा बदलना होगा. सही योजना और सही समय पर काम करके फसल को बचाया जा सकता है.

खेत में पानी रोकना होगा सबसे जरूरी

डॉ. तले ने बताया कि कम बारिश के समय खेत में पानी बचाकर रखना बहुत जरूरी होता है. किसानों को खेत की मेढ़ मजबूत करनी चाहिए ताकि बारिश का पानी बाहर न जाए. ढाल वाली जमीन में पानी रोकने के लिए सही तरीके अपनाने चाहिए. इससे खेत में नमी बनी रहती है और फसल को फायदा मिलता है.

कम पानी वाली फसलों पर दें ध्यान

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि इस बार ज्यादा पानी मांगने वाली फसलें कम लगाएं. उनकी जगह सोयाबीन, तूर और मूंग जैसी कम पानी वाली फसलें बोना अच्छा रहेगा. इससे कम बारिश में भी खेती अच्छी हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि पहली अच्छी बारिश होने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए. जल्दी बुवाई करने से नुकसान हो सकता है.

मिट्टी और नमी बचाने पर जोर

डॉ. तले ने कहा कि खेत की मिट्टी को ढीला रखना चाहिए ताकि पानी जमीन के अंदर ज्यादा समय तक रह सके. साथ ही किसानों को मल्चिंग और जैविक खाद का उपयोग बढ़ाना चाहिए. इससे खेत में नमी बनी रहती है और पौधों को ताकत मिलती है.

सही तैयारी से बच सकती है फसल

विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश जरूर एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सही तैयारी से किसान अपनी फसल बचा सकते हैं. अगर किसान पानी का सही उपयोग करें, सही फसल चुनें और वैज्ञानिक सलाह मानें, तो कम बारिश में भी अच्छी पैदावार मिल सकती है. सरकार और कृषि विभाग भी किसानों को लगातार सलाह दे रहे हैं, ताकि खेती पर ज्यादा असर न पड़े.

ये भी पढ़ें: 

किसानों की जमीन पर अफसरों का कब्जा? करोड़ों की डील ने खोली भ्रष्टाचार की पोल
Milk Production: दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किए ये पांच काम तो खूब होगा मुनाफा

POST A COMMENT