
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के साझा प्रयास से चल रहा “किसान कारवां” प्रदेश के किसानों की आवाज बन चुका है. यह केवल एक कार्यक्रम या मंच नहीं रहा, बल्कि किसानों की समस्याओं के समाधान, नई तकनीकों की जानकारी और सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन गया. 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुई यह यात्रा अब बुंदेलखंड के सात जिलों तक पहुंच चुकी है. करीब 900 किलोमीटर की यात्रा कर किसान कारवां ने 40 गांवों में 10 हजार से अधिक किसानों से संवाद किया. इस दौरान किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन, जैविक खेती, सरकारी योजनाओं और कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई.
आज बुंदेलखंड की तस्वीर बदल रही है. सूखे और पलायन के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र अब जैविक खेती, बागवानी, पशुपालन और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है. कभी जहां खेती करना चुनौती माना जाता था, वहीं अब यहां धान, गेहूं, दलहन और बागवानी की फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जा रही हैं.केंद्र में प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व और उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार के प्रयासों से बुंदेलखंड में सिंचाई और जल संरक्षण की तस्वीर बदली है.
जालौन जैसे जिलों में किसान अब मटर की खेती से अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा रहे हैं. खेत तालाब, सूक्ष्म सिंचाई और आधुनिक तकनीकों के कारण खेती अब लाभकारी बनती जा रही है.
सरकार ने वर्ष 2022 में बुंदेलखंड के सात जिलों में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना शुरू की थी, जिसका असर अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है. किसान अब रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं.
जालौन के प्रगतिशील किसान अशोक सिंह बताते हैं कि अब उनके खेतों में उर्वरक और पानी की कोई समस्या नहीं है. वे 22 एकड़ भूमि में जैविक तरीके से मटर, गेहूं और चना जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं. इससे उनकी लागत घटी है और आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.
बुंदेलखंड के कई जिलों में मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा चिंताजनक स्तर तक घट चुकी थी. ऐसे में सरकार अब गो आधारित प्राकृतिक खेती और पशुपालन को बढ़ावा दे रही है. जालौन से लेकर ललितपुर तक किसान पशुपालन के जरिए न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ा रहे हैं, बल्कि जैविक खाद तैयार कर मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधार रहे हैं. बांदा के उप कृषि निदेशक अभय कुमार यादव के अनुसार, अब बुंदेलखंड में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी और नई तकनीकों की उपलब्धता से लगभग हर फसल उगाना संभव हो गया है.
किसान कारवां के मंच से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के महत्व की भी जानकारी दी गई.अधिकारियों ने बताया कि यह किसानों के लिए आधार कार्ड की तरह काम करेगी.
चित्रकूट में किसान कारवां के साथ फार्मर रजिस्ट्री कैंप भी लगाया गया, जहां किसानों का पंजीकरण किया गया. जिला कृषि अधिकारी राजपति शुक्ला ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री से किसानों को एक यूनिक पहचान नंबर मिलेगा, जिसके जरिए उनके खेत और खेती का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा. भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ इसी रजिस्ट्री के आधार पर मिलने की संभावना है.
महोबा के पशु चिकित्सक डॉ. सुरेश पाल ने किसान कारवां के मंच से किसानों को नेशनल लाइव स्टॉक मिशन की जानकारी दी.उन्होंने बताया कि किसान सुकर पालन, बकरी पालन और कुक्कुट पालन जैसी योजनाओं का लाभ लेकर 50 प्रतिशत तक अनुदान प्राप्त कर सकते हैं.
बांदा के उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश ने किसानों को पशुओं में होने वाली बीमारियों, रेबीज से बचाव और पथरी जैसी समस्याओं की पहचान और उपचार के उपाय बताए.
बुंदेलखंड में पशुधन की संख्या अधिक होने के बावजूद दुग्ध उत्पादन अपेक्षाकृत कम था. अब पशुपालन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे सेक्स सॉर्टेड सीमेन से किसानों को काफी लाभ मिल रहा है.
जालौन के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. पवन कुमार ने बताया कि इस तकनीक से 90 प्रतिशत तक बछिया पैदा होने की संभावना रहती है, जिससे बेहतर नस्ल की गायों की संख्या बढ़ रही है और दुग्ध उत्पादन में सुधार हो रहा है.
महोबा और झांसी जैसे जिलों में पथरीली जमीन पर पारंपरिक खेती मुश्किल मानी जाती थी.ऐसे क्षेत्रों में विंध्य औद्यानिक विकास योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.
योजना के तहत एक हेक्टेयर में 100 आम के पौधे या 278 अमरूद, आंवला और नींबू के पौधे लगाने पर किसानों को तीन वर्षों तक प्रतिमाह ₹3000 की सहायता दी जा रही है.इसका असर यह हुआ कि पूरे बुंदेलखंड में फलदार पौधों की संख्या तेजी से बढ़ी है.
बांदा कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा ओझा ने किसानों को मोटे अनाज की खेती के फायदे बताए.उन्होंने कहा कि मोटे अनाज की खेती में लागत कम आती है, सिंचाई और उर्वरक की जरूरत भी कम होती है, जबकि बाजार में इनकी मांग और कीमत लगातार बढ़ रही है.
उन्होंने किसानों को वैल्यू एडिशन के जरिए बाजरा और ज्वार से बिस्कुट व अन्य उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की सलाह दी.
किसान कारवां के दौरान अधिकारियों ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी भी दी. चित्रकूट के उप कृषि निदेशक राजकुमार ने किसानों को कम प्रीमियम में प्राकृतिक आपदा से फसल सुरक्षा के फायदे बताए.साथ ही फसल चक्र अपनाकर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की सलाह दी.
किसान कारवां के मंच से कृषि विज्ञान केंद्रों को “किसानों का अस्पताल” बताया गया. कार्यक्रम में किसानों को समझाया गया कि जैसे पशुओं के इलाज के लिए अस्पताल होते हैं, वैसे ही फसलों और खेती की समस्याओं के समाधान के लिए कृषि विज्ञान केंद्र मौजूद हैं.
यहां किसानों को फसल रोग, आधुनिक खेती, पशुपालन और बागवानी से जुड़ी मुफ्त सलाह और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है.
बुंदेलखंड में खेत तालाब योजना किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है. महोबा के सीजहरी गांव के प्रधान नरेश राजपूत ने बताया कि खेत तालाब से खेत का पानी खेत में ही संरक्षित हो रहा है, जिससे सिंचाई आसान हुई है और भूजल स्तर में सुधार आया है.
इसके अलावा स्प्रिंकलर योजना के तहत किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जिससे पानी की बचत के साथ सिंचाई का दायरा बढ़ा है.
झांसी में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने किसानों को “हर खेत में तालाब और हर मेड़ पर पेड़” लगाने का संदेश दिया. उन्होंने पशुपालन को खेती की मजबूती का आधार बताते हुए किसानों से इसे अपनाने की अपील की.
बुंदेलखंड में आवारा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग योजना किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है.योजना के तहत किसानों को ये 60 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है.
सोलर फेंसिंग के जरिए खेतों की सुरक्षा के साथ सोलर लाइट की मदद से पशुओं को खेतों से दूर रखा जा रहा है. किसान कारवां के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने इस योजना से जुड़ी जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की.
बुंदेलखंड में किसान कारवां केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों के लिए सीख, संवाद और समाधान का मंच बनकर उभरा है. गांव-गांव पहुंचकर इस अभियान ने किसानों को आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने का काम किया है.
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