लाडली बहना योजना की 36वीं किस्त कल होगी जारी (फाइल फोटो)मध्य प्रदेश की सवा करोड़ लाडली बहनों के लिए खुशखबरी है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 मई को नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव से ‘मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना’ की 36वीं किस्त जारी करेंगे. इस मौके पर करोड़ों महिलाओं के बैंक खातों में एक क्लिक के जरिए 1500-1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी. योजना के तहत राज्य की 1 करोड़ 25 लाख से ज्यादा पात्र महिलाओं को इस किस्त का सीधा लाभ मिलेगा. उनके खातों में कुल 1835 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी. राज्य सरकार ने कहा कि यह आर्थिक मदद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही है.
राज्य सरकार की ओर से जारी एक प्रेस बयान के मुताबिक, लाडली बहना योजना ने प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर स्पष्ट असर डाला है. नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं की घरेलू फैसलों में भागीदारी बढ़ी है. साथ ही परिवार के पोषण, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर खर्च करने की क्षमता भी मजबूत हुई है. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसका प्रभाव देखा जा रहा है.
बता दें कि यह योजना जून 2023 में शुरू हुई थी और अब तक 35 किस्त सफल रूप से लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर की जा चुकी हैं. सरकारी बयान के मुताबिक, शुरुआत से लेकर अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की जा चुकी है, जिससे यह योजना राज्य की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ योजनाओं में शामिल हो गई है.
योजना के तहत दी जाने वाली मासिक सहायता में समय-समय पर वृद्धि की गई है. शुरुआत में 1000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया. बाद में नवंबर 2025 से इसे बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह कर दिया गया. इससे लाभार्थी महिलाओं को अधिक आर्थिक सहारा मिला है.
राज्य सरकार ने इस योजना के लिए हर साल बड़े स्तर पर बजट आवंटित किया है. 2023-24 से लेकर 2025-26 तक लगातार खर्च में बढ़ोतरी की गई है. वहीं, 2026-27 के लिए भी 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है. इससे साफ है कि सरकार इस योजना को दीर्घकालिक रूप से जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
इस योजना का असर सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहा है. इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायों और रोजगार गतिविधियों से जुड़ रही हैं. बैंक खातों में सीधे पैसे आने से उनकी वित्तीय समझ भी बेहतर हुई है. योजना ने सामाजिक स्तर पर भी महिलाओं की भूमिका को मजबूत किया है.
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