Innovative Farmer: अब नहीं सड़ेगा प्याज, राजस्थान के किसान का देसी 'कोल्ड स्टोरेज' दिलाएगा फसल का सही दाम

Innovative Farmer: अब नहीं सड़ेगा प्याज, राजस्थान के किसान का देसी 'कोल्ड स्टोरेज' दिलाएगा फसल का सही दाम

प्याज और लहसुन की खेती में सबसे बड़ी चुनौती फसल को खराब होने से बचाना है, क्योंकि उचित भंडारण न होने से नमी और गर्मी के कारण प्याज बहुत जल्दी सड़ने लगता है. इस सड़न के डर से किसानों को अपनी कड़ी मेहनत की फसल मजबूरन बाजार में बहुत कम और औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है.

Advertisement
Innovative Farmer: अब नहीं सड़ेगा प्याज, राजस्थान के किसान का देसी 'कोल्ड स्टोरेज' दिलाएगा फसल का सही दामप्‍याज किसान का देसी जुगाड़

प्याज और लहसुन की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती फसल की पैदावार नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रखना है. अक्सर देखा जाता है कि उचित स्टोरेज  की व्यवस्था न होने के कारण कटाई के बाद प्याज की एक बड़ी मात्रा नमी और गर्मी की वजह से सड़ जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है. स्टोरेज की सुविधा न होने की मजबूरी में किसानों को अपनी मेहनत की फसल को कौड़ियों के दाम यानी औने-पौने दाम पर बाजार में बेचना पड़ता है, क्योंकि उन्हें डर होता है कि अगर आज नहीं बेचा तो कल तक फसल खराब हो जाएगी.

इसी गंभीर परेशानी से निजात पाने के लिए राजस्थान के जोधपुर से अलग होकर बना फलोदी जिले के गांव बीठ प्रगतिशील किसान, संतोष कुमार ने एक कम लागत वाली और  अपनी सूझबूझ से एक ऐसा वेंटिलेटेड स्ट्रक्चर तैयार किया है, जिससे प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और जब बाजार में दाम बेहतर हों, तब उसे बेचकर मुनाफा कमाया जा सकता है.

किसान का कमाल, प्याज सड़ने की टेंशन खत्म

संतोष कुमार ने इस इनोवेशन को वैज्ञानिक आधार और पारंपरिक ज्ञान के मेल से बनाया है. इस स्ट्रक्चर की सबसे बड़ी खासियत इसकी बनावट है, जिसे 40 फीट लंबाई और 10 फीट की ऊंचाई के साथ तैयार किया गया है. उन्होंने इसमें लोहे के गैल्वेनाइज्ड आयरन  चैनल्स का उपयोग किया है, ताकि ढांचा टिकाऊ और स्थिर रहे. अक्सर लोहे के बंद कमरों में गर्मी बढ़ जाती है, इसलिए संतोष कुमार ने यहां बांस का इस्तेमाल किया है.

उन्होंने फर्श और दीवारों केलिए 1.5 इंच व्यास वाले बांस के डंडों का उपयोग किया है, जिन्हें 1.5 इंच की दूरी पर लगाया गया है. यह गैप सुनिश्चित करता है कि हवा का प्रवाह नीचे से ऊपर और चारों तरफ से बना रहे. यह निरंतर वेंटिलेशन प्याज के तापमान को नियंत्रित रखता है और उसे सड़ने से बचाता है, जो कि किसी भी सामान्य गोदाम में संभव नहीं हो पाता है.

देसी कोल्ड स्टोरेज ऐसे रहेगी सुरक्षित

इस स्ट्रक्चर की छत को एस्बेस्टस शीट से बनाया गया है और इसे मुख्य ढांचे से लगभग 2 फीट बाहर की ओर निकाला गया है. यह डिजाइन बहुत सोच-समझकर बनाया गया है, ताकि बारिश का पानी सीधे दीवारों या प्याज पर न पड़े. बारिश के छींटों से बचने पर प्याज में अंकुरण  और काला मोल्ड लगने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है.

राजस्थान की भीषण गर्मी में भी बांस की दीवारें अंदर के वातावरण को ठंडा रखती हैं और प्राकृतिक एयर कंडीशनर की तरह काम करती हैं. जमीन से लगभग 2 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया प्लेटफॉर्म यह सुनिश्चित करता है कि मिट्टी की नमी प्याज तक न पहुंचे और नीचे से हवा का रास्ता हमेशा खुला रहे. इसके कारण है प्याज सुरक्षित और बेहतर क्वालिटी की बनी रहती है 

अधिक गर्मी और बरसात से प्याज होती है खराब

प्याज और लहसुन की खेती में सबसे बड़ी समस्या फसल को खराब होने से बचाना है, क्योंकि उचित भंडारण न होने से नमी और भीषण गर्मी के कारण प्याज बहुत जल्दी सड़ने लगता है. संतोष कुमार ने किसान तक को बताया कि जब राजस्थान में तापमान 40 से 45 डिग्री के ऊपर चला जाता है तो मई-जून में निकलने वाली रबी की प्याज गर्मी से खराब होने लगती है और बाद में बरसात की नमी उसे पूरी तरह सड़ा देती है. इसी मजबूरी के कारण किसानों को अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है.

इस  'देसी कोल्ड स्टोरेज जो बांस और लोहे के पाइपों से बने इस विशेष वेंटिलेटेड स्ट्रक्चर में प्याज अक्टूबर तक बिल्कुल सुरक्षित रहता है. वे अपनी फसल को सही समय पर ऊंचे दामों पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते है. राजस्थान के बारां, झालावाड़, कोटा, भीलवाड़ा, अलवर और सीकर जैसे जिले, जो प्याज और लहसुन के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं, वहां इस तकनीक लाभ लिया जा सकता  हैं. यह तकनीक राजस्थान के हजारों प्याज उत्पादक किसानों की तकदीर बदलने का दम रखती है

 कम खर्च में 25 टन प्याज वाला स्टोरेज

संतोष कुमार कहते हैं कि यह तकनीक आर्थिक नजरिये छोटे और मध्यम वर्गीय किसानों के लिए काफी फायदेमंद है. इस पूरे स्ट्रक्चर को बनाने में लगभग 1.75  लाख रूपये खर्च आता है, जिसमें 250 क्विंटल प्याज और लहसुन को आसानी से स्टोर किया जा सकता है. संतोष ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस स्ट्रक्चर में प्याज को चार महीने तक बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रखा जा सकता है.

अगर हम बाजार के गणित को समझें, तो सीजन के समय प्याज की कीमतें अक्सर बहुत कम होती हैं, लेकिन दो-तीन महीनों बाद वही कीमतें दोगुनी या तिगुनी हो जाती हैं. ऐसे में यह स्टोरेज स्ट्रक्चर किसान को वह शक्ति देता है कि वह अपनी फसल को रोक सके और सही समय पर बेचकर अपनी आय में भारी बढ़ोतरी कर सके. यह कम लागत वाला निवेश एक ही सीजन में अपनी पूरी लागत वसूल करने की क्षमता रखता है.

POST A COMMENT