बीज से बाजार तक व्यवस्था सुधारने का समय, खरीफ सम्मेलन में बोले शिवराज सिंह

बीज से बाजार तक व्यवस्था सुधारने का समय, खरीफ सम्मेलन में बोले शिवराज सिंह

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले देश के किसानों को नमन किया और कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन करीब 376.563 मिलियन टन पहुंच गया है.

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बीज से बाजार तक व्यवस्था सुधारने का समय, खरीफ सम्मेलन में बोले शिवराज सिंहशिवराज सिंह चौहान

पूसा, नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-खरीफ अभियान 2026 के दूसरे दिन देशभर के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने कृषि के भविष्य और किसानों की समृद्धि को लेकर गहन मंथन किया गया. केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि खेती को नई दिशा और नई गति दी जाए. इसके लिए नीति, नवाचार और निष्ठा के साथ किसान-केंद्रित और परिणाम आधारित काम करना बेहद जरूरी है.

उन्होंने इस सम्मेलन को 'एग्रीकल्चर टीम ऑफ इंडिया' की ऐतिहासिक बैठक बताते हुए कहा कि आज देश के सभी राज्य कृषि विकास और किसान हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एकजुट नजर आ रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं, तब खेती में बड़े बदलाव और बेहतर परिणाम दिखाई देते हैं.

खाद्यान्न उत्पादन में भारत ने हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले देश के किसानों को नमन किया और कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन करीब 376.563 मिलियन टन पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों के शोध और राज्यों के सहयोग का परिणाम है. उन्होंने गर्व के साथ कहा कि चावल उत्पादन में भारत दुनिया में शीर्ष स्थान पर पहुंच चुका है, जबकि गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन में भी लगातार प्रगति हो रही है.

किसान हित में अब तेज फैसलों का समय

हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि उपलब्धियां अंतिम लक्ष्य नहीं हैं. उन्होंने कहा कि अब खेती को और अधिक लाभकारी बनाना, किसानों की आय बढ़ाना और देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उनके अनुसार खेती केवल उत्पादन का विषय नहीं, बल्कि देश की जीवनरेखा है. इसलिए कृषि से जुड़े हर व्यक्ति को मिशन मोड में काम करना होगा.

सम्मेलन में बीज उपलब्धता का मुद्दा प्रमुखता से उठा. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अच्छा बीज ही बेहतर उत्पादन की पहली शर्त है. उन्होंने चिंता जताई कि कई बार देश में पर्याप्त बीज उपलब्ध होने के बावजूद सही समय पर किसानों तक नहीं पहुंच पाता. उन्होंने राज्य सरकारों से कहा कि वे ब्रीडर सीड और अन्य जरूरी बीज समय पर उठाएं और वितरण व्यवस्था मजबूत करें. साथ ही उन्होंने खराब क्वालिटी वाले बीजों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए.

बीज से बाजार तक कृषि व्यवस्था हो पूरी तरह दुरुस्त

कृषि मंत्री ने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीज भंडार की व्यवस्था की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत किसानों तक बीज पहुंचाया जा सके. उन्होंने राज्यों को कम बारिश या अन्य प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने के लिए जिला स्तर तक तैयारी रखने की सलाह दी.

उर्वरक और मिट्टी स्वास्थ्य को लेकर भी उन्होंने गंभीरता दिखाई. उन्होंने कहा कि स्वाइल हेल्थ कार्ड केवल कागज तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि किसानों को इसका वास्तविक लाभ मिलना चाहिए. इससे किसान यह समझ सकेंगे कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए. इसी उद्देश्य से उन्होंने “खेत बचाओ अभियान” को जनआंदोलन बनाने की अपील की. यह अभियान 1 जून से 30 जून तक चलाया जाएगा, जिसमें वैज्ञानिक, अधिकारी, जनप्रतिनिधि और किसान मिलकर गांव-गांव जागरूकता फैलाएंगे.

PM मोदी की अपील पर कृषि क्षेत्र में सभी राज्य करें रिफॉर्म

दलहन और तिलहन उत्पादन पर उन्होंने कहा कि यदि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिलेगा, तो वे इन फसलों की ओर आकर्षित नहीं होंगे. इसलिए पीएम-आशा जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और समयबद्ध खरीद पर जोर दिया गया. एफपीओ, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र शोध, नवाचार और नई तकनीक को खेत तक पहुंचाने की सबसे मजबूत कड़ी बन सकते हैं. उन्होंने राज्यों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को मिलकर काम करने का आह्वान किया.

सम्मेलन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर राज्य को अपने एग्री-क्लाइमेटिक हालात और स्थानीय संसाधनों के अनुसार कृषि रोडमैप तैयार करना चाहिए. उन्होंने दोहराया कि नियम और प्रक्रियाएं किसानों की सुविधा के लिए हैं, किसान नियमों के लिए नहीं, इसलिए जहां भी अनावश्यक जटिलताएं हैं, वहां सुधार जरूरी है. शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, राज्यों के सहयोग, वैज्ञानिकों के शोध और किसानों की मेहनत से भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा और दुनिया के लिए एक मजबूत कृषि मॉडल बनकर उभरेगा.

सम्मेलन में कई राज्यों के कृषि मंत्री रहे मौजूद

सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी के अलावा ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया. केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट और कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस चर्चा का हिस्सा बने. 

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