NABARDराष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से बिहार को लेकर राज्य फोकस पेपर (एसएफपी) 2026–27 जारी किया गया. वहीं, वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत कुल अनुमानित ऋण क्षमता ₹2,80,393 करोड़ आंकी गई है, जिसमें कृषि के क्षेत्र में कुल ₹1,24,558 करोड़ रुपए की ऋण क्षमता आंकी गई. पटना के एक निजी होटल में आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी कार्यक्रम के दौरान राज्य फोकस पेपर 2026–27 का विमोचन किया गया. इस दौरान राज्य के वित्त मंत्री, कृषि मंत्री, उद्योग मंत्री एवं सहकारिता मंत्री मौजूद रहे. हालांकि, नाबार्ड की ओर से जारी अनुमानित ऋण क्षमता को लेकर बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह द्वारा सवाल भी खड़े किए गए.
नाबार्ड की ओर से जारी राज्य फोकस पेपर में बिहार के सभी 38 जिलों के लिए आकलित ऋण प्रवाह प्रस्तुत किया गया. वहीं, 2026–27 के लिए कृषि क्षेत्र में कुल ₹1,24,558 करोड़ की ऋण क्षमता आंकी गई है, जिसमें डेयरी को लेकर ₹9,689 करोड़, जल संसाधन ₹4,824 करोड़, कृषि यंत्रीकरण ₹6,391 करोड़, भंडारण अवसंरचना ₹7,951 करोड़ तथा कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण ₹6,218 करोड़ शामिल हैं. वहीं, एमएसएमई क्षेत्र के लिए ₹1,24,148 करोड़ की ऋण क्षमता का आकलन किया गया है. नाबार्ड की ओर से जारी यह आकलन भारतीय रिज़र्व बैंक की प्राथमिकता क्षेत्र दिशा-निर्देशों, केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों तथा सतत कृषि एवं ग्रामीण विकास के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने बताया कि 31 मार्च 2025 की स्थिति के अनुसार बिहार का ऋण-जमा (सीडी) अनुपात 57.36% है, जो देश के सभी राज्यों में सबसे कम है. उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि वे कृषि एवं सहायक क्षेत्रों, एमएसएमई तथा अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में राज्य फोकस पेपर में निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध रहें. इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार के विभागों, बैंकों, गैर-सरकारी संगठनों एवं अन्य संस्थानों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया.
वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बैंकों से ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर ऋण उपलब्ध कराने एवं निवेश दर बढ़ाने का आग्रह किया तथा कहा कि बिहार के विकास के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है. वहीं, कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार की 76–80% जनसंख्या कृषि एवं सहायक गतिविधियों पर निर्भर है. लेकिन बैंकों द्वारा किसानों को आसानी से ऋण नहीं मिलता है. इसको लेकर बैंकों को काम करने की जरूरत है. इसके साथ ही सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध सहकारी समितियों की स्थापना की योजना बनाई जा रही है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में पैक्स एवं सहकारी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है.
बिहार सरकार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि बिहार की आर्थिक वृद्धि दर लगातार राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है.इसमें बिहार के लोगों का बहुत बड़ा योगदान है. इसके साथ ही उन्होंने नाबार्ड की ओर से जारी आकलित ऋण प्रवाह की राशि को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को बैंकों के जरिए उतनी आर्थिक ऋण सहायता नहीं मिल पाती है, जितनी बिहार के लोगों को जरूरत है. इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने की आवश्यकता है.
आगे उन्होंने कहा कि बिहार में बाजार संपर्क अवसंरचना में सुधार से कृषि को गति मिली है.वर्तमान में मत्स्य पालन, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र सबसे तेजी से बढ़ने वाले उप-क्षेत्र हैं. उन्होंने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए मसाले, बागवानी, तिलहन, दलहन, मखाना, मशरूम, सरसों और शहद को प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्र बताया.
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