शहद की तरफ बढ़ रहा राज्यहरियाणा अब केवल दूध उत्पादन यानी श्वेत क्रांति तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अब राज्य “स्वीट क्रांति” यानी शहद उत्पादन में भी आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है. राज्य सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं चला रही है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्व मधुमक्खी दिवस पर कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक मधुमक्खी पालकों की संख्या बढ़ाकर 7,750 करना और शहद उत्पादन को 15,500 मीट्रिक टन तक पहुंचाना है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मधुमक्खियां केवल शहद ही नहीं देतीं, बल्कि खेती के लिए भी बहुत जरूरी होती हैं. मधुमक्खियां फूलों से पराग लेकर दूसरी फसलों तक पहुंचाती हैं, जिससे फसलों की पैदावार बढ़ती है. सरसों, सूरजमुखी, कपास, फलों और सब्जियों की खेती में मधुमक्खियों का बड़ा योगदान होता है. इसलिए सरकार किसानों को खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन करने के लिए प्रेरित कर रही है.
हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालन को भावांतर भरपाई योजना में भी शामिल किया है. इसके तहत शहद का सुरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलो तय किया गया है. इसका फायदा यह होगा कि अगर बाजार में शहद की कीमत कम हो जाती है, तब भी किसानों को नुकसान नहीं होगा. सरकार किसानों को निश्चित आय देने की कोशिश कर रही है. मुख्यमंत्री ने इस योजना के तहत 30 किसानों के खातों में 1 करोड़ 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी जारी की.
सरकार मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी के बक्से, कॉलोनियां और जरूरी उपकरण खरीदने पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है. इससे छोटे किसान और गांव के लोग भी कम खर्च में यह काम शुरू कर सकते हैं. सरकार का कहना है कि मधुमक्खी पालन ऐसा व्यवसाय है, जिसमें कम जमीन और कम लागत लगती है, लेकिन कमाई अच्छी होती है.
सरकार का कहना है कि मधुमक्खी पालन गांवों में रोजगार बढ़ाने का अच्छा तरीका बन सकता है. महिलाएं, युवा और छोटे किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं. कई लोग शहद के साथ-साथ बी-वैक्स, रॉयल जेली और दूसरे उत्पाद बनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. इन चीजों की दवा और कॉस्मेटिक कंपनियों में भी काफी मांग है.
नेशनल मधुक्रांति पोर्टल पर हरियाणा के 3 हजार से ज्यादा मधुमक्खी पालक रजिस्टर्ड हैं. इस मामले में हरियाणा देश में पहले स्थान पर है. सरकार मधुमक्खी पालन को और बढ़ाने के लिए किसानों को प्रशिक्षण भी दे रही है. कुरुक्षेत्र के रामनगर में इजरायल तकनीक पर आधारित देश का पहला एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र बनाया गया है. यहां किसानों को शहद निकालने, स्टोर करने और बेचने की ट्रेनिंग दी जाती है.
आज खेती में लागत लगातार बढ़ रही है और जमीन भी छोटी होती जा रही है. ऐसे में मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का अच्छा साधन बन रहा है. सरकार का मानना है कि अगर किसान खेती के साथ मधुमक्खी पालन भी करेंगे, तो उनकी आय बढ़ेगी और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. हरियाणा सरकार अब राज्य को “हनी हब” बनाने की दिशा में काम कर रही है.
ये भी पढ़ें:
आम लोगों को झटका, किसानों को राहत! केरल में दूध 4 रुपये प्रति लीटर महंगा
अब फसल खराब होने पर नहीं बढ़ेगी चिंता, किसानों को मिलेगा 11 हजार करोड़ का सुरक्षा कवच
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today