मनरेगा में मजदूरों की मेहनत अटकी!छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले से मनरेगा योजना की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकार के बड़े-बड़े दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकार कहती है कि गांव के गरीब मजदूरों को ज्यादा रोजगार दिया जा रहा है और आने वाले समय में 100 दिन की जगह 125 से 150 दिन तक काम मिलेगा. लेकिन दूसरी तरफ गांवों में काम करने वाले मजदूर अपनी मेहनत की मजदूरी के लिए परेशान घूम रहे हैं.
गांव के मजदूरों ने कड़ी धूप में मेहनत करके कुआं खोदा, तालाब गहरा किया, मिट्टी का काम किया और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी कई काम पूरे किए. सुबह जल्दी उठकर मजदूर काम पर पहुंचे और दिनभर पसीना बहाया. लेकिन जब मजदूरी मिलने का समय आया, तो उनका पैसा अटक गया.
अब मजदूर अपनी मजदूरी के लिए पंचायत और जनपद कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं. मजदूरों का कहना है कि उन्हें काम तो मिल गया, लेकिन मेहनत की कमाई समय पर नहीं मिली. इससे उनके घरों की हालत खराब होती जा रही है.
एमसीबी जिले के तीनों विकासखंडों में करोड़ों रुपये का भुगतान अभी तक बाकी है. मनेंद्रगढ़ विकासखंड में करीब 5 करोड़ 43 लाख रुपये मजदूरों को नहीं मिले हैं. वहीं खड़गवां विकासखंड में 4 करोड़ 18 लाख रुपये और भरतपुर विकासखंड में 5 करोड़ 32 लाख रुपये का भुगतान अटका हुआ है. पूरे जिले में लगभग 14 करोड़ 93 लाख रुपये मजदूरों की मजदूरी अभी तक रुकी हुई है.
यह सुनकर गांव के लोग हैरान हैं कि आखिर मजदूरों का पैसा कहां अटक गया. लोग पूछ रहे हैं कि जब सरकार इतनी बड़ी योजनाओं का प्रचार कर सकती है, तो गरीब मजदूरों की मजदूरी समय पर क्यों नहीं दे पा रही.
मजदूरी नहीं मिलने की वजह से गांव के गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. कई लोग उधार लेकर घर चला रहे हैं. किसी के बच्चों की पढ़ाई रुक रही है तो किसी को राशन खरीदने में परेशानी हो रही है. मजदूरों का कहना है कि उनके लिए मजदूरी ही सबसे बड़ा सहारा है. अगर समय पर पैसा नहीं मिलेगा, तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा.
पिपरिया गांव के मजदूर कृष्णा ने बताया कि उन्हें अभी तक केवल दो हफ्ते की मजदूरी मिली है, जबकि तीन हफ्ते का पैसा बाकी है. उन्होंने कहा कि मजदूरों को एक दिन का 261 रुपये मिलता है और वे सुबह 6 बजे से 10 बजे तक धूप में काम करते हैं. फिर शाम को दोबारा काम करने जाते हैं.
देव सिंह और चंदा नाम के मजदूरों ने भी बताया कि उन्हें कई हफ्तों की मजदूरी अभी तक नहीं मिली है. जब वे अधिकारियों से पूछते हैं तो उन्हें सिर्फ यही जवाब मिलता है कि “पैसा जल्द मिल जाएगा.”
रोजगार सहायक प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि पंचायत की तरफ से मास्टर रोल समय पर जमा किया जा रहा है, लेकिन मजदूरी खाते में आने में थोड़ी देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि अभी छह हफ्तों का काम हुआ है, जिसमें से चार हफ्तों की मजदूरी आ चुकी है और दो हफ्तों का भुगतान बाकी है.
उन्होंने यह भी कहा कि कई मजदूर पासबुक में एंट्री नहीं करवाते और आधार कार्ड से पैसा निकाल लेते हैं, इसलिए उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिल पाती.
राज्य के मंत्री Shyam Bihari Jaiswal ने कहा कि सरकार मनरेगा योजना में सुधार कर रही है. उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत काम के दिनों को बढ़ाया गया है और मजदूरी जल्दी देने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने माना कि वित्तीय वर्ष बदलने के समय अप्रैल और मई में भुगतान में थोड़ी परेशानी हुई है, लेकिन जल्द ही मजदूरों का पैसा जारी कर दिया जाएगा.
मंत्री ने कहा कि पैसे की कोई कमी नहीं है और अगर कहीं भुगतान रुका है तो उसे जल्द ठीक किया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों से बात करके मजदूरों की समस्या हल करने का भरोसा दिया.
मनरेगा योजना का मकसद गांव के गरीब लोगों को रोजगार और आर्थिक सहारा देना है. लेकिन जब मजदूरी समय पर नहीं मिलती, तो यही योजना मजदूरों के लिए परेशानी बन जाती है. मजदूरों का कहना है कि उन्हें सिर्फ काम नहीं चाहिए, बल्कि मेहनत का पैसा भी समय पर चाहिए. क्योंकि गरीब मजदूर के लिए उसकी मजदूरी ही उसके परिवार की जिंदगी चलाने का सबसे बड़ा सहारा होती है. (धीरेन्द्र विश्वकर्मा का इनपुट)
ये भी पढ़ें:
छोटे किसानों के लिए बड़ी उम्मीद, खेती को लाभकारी बनाने पर सरकार का जोर
देश की अनोखी नीमच हर्बल मंडी: यहां फूल, पत्ती, जड़ और कांटों तक की होती है खरीद, किसानों को मिलते हैं लाखों के दाम
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today