हिमाचल सरकार का बड़ा मिशन, ‘हिम परिवार रजिस्टर’ से जुड़ रहे हजारों किसान

हिमाचल सरकार का बड़ा मिशन, ‘हिम परिवार रजिस्टर’ से जुड़ रहे हजारों किसान

हिमाचल प्रदेश में किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए कृषि विभाग तेजी से काम कर रहा है. राज्य सरकार ने इस वित्त वर्ष में ‘हिम परिवार रजिस्टर’ से एक लाख नए किसानों को जोड़ने का बड़ा लक्ष्य रखा है.

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हिमाचल सरकार का बड़ा मिशन, ‘हिम परिवार रजिस्टर’ से जुड़ रहे हजारों किसानहिमाचल सरकार का बड़ा मिशन (AI- तस्वीर)

हिमाचल प्रदेश में किसानों को सरकारी योजनाओं का फायदा आसानी और पारदर्शी तरीके से मिले, इसके लिए कृषि विभाग तेजी से काम कर रहा है. राज्य सरकार ने इस वित्त वर्ष में ‘हिम परिवार रजिस्टर’ से एक लाख नए किसानों को जोड़ने का बड़ा लक्ष्य रखा है. खास बात यह है कि अब तक लगभग 70 हजार से ज्यादा किसान इस रजिस्टर से जुड़ चुके हैं, यानी सरकार अपने लक्ष्य का करीब 70 फीसदी हिस्सा पहले ही पूरा कर चुकी है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस पहल से किसानों तक सरकारी मदद सीधे और बिना किसी परेशानी के पहुंच सकेगी.

CM सुखू ने अधिकारियों को दिए ये निर्देश

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आने वाले समय में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना का फायदा ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाया जाए. सरकार चाहती है कि अधिक किसान इस योजना से जुड़ें और अपनी फसलों का सही दाम पा सकें. सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है. सरकार का मानना है कि जब किसानों की आमदनी बढ़ेगी, तो उसका फायदा गांव के दूसरे लोगों और स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी.

प्राकृतिक खेती से जुड़े 2.23 लाख किसान 

राज्य सरकार का दावा है कि प्रदेश के करीब 2.23 लाख किसान और बागवानी से जुड़े परिवार पूरी तरह या आंशिक रूप से प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं. खास बात यह है कि यह खेती अब राज्य की लगभग 99.3 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुकी है, जिससे साफ है कि गांव-गांव में किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती से न सिर्फ किसानों की लागत कम हो रही है, बल्कि मिट्टी की क्वालिटी भी बेहतर हो रही है और लोगों को रसायन मुक्त फसलें मिल रही हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 2026-27 के बजट में प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बड़ी बढ़ोतरी की है.

हिमाचल में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

सरकार प्राकृतिक तरीके से उगाए गए गेहूं को 80 रुपये प्रति किलो और मक्का को 50 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही है. इसके अलावा कच्ची हल्दी का MSP 150 रुपये प्रति किलो तय किया गया है. चंबा जिले की पांगी घाटी में उगाए गए जौ को 80 रुपये प्रति किलो और अदरक को 30 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है. सरकार का कहना है कि इन बेहतर कीमतों से किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

63 हजार किसानों से प्राकृतिक उपज खरीदने की तैयारी

अब तक राज्य सरकार 7,382 किसानों से 11,329 क्विंटल प्राकृतिक उपज खरीद चुकी है. इसके बदले किसानों के बैंक खातों में सीधे 6.40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं. इससे किसानों को अपनी फसल का भुगतान समय पर और पारदर्शी तरीके से मिल रहा है. कृषि विभाग ने इस साल लगभग 63 हजार किसानों से प्राकृतिक खेती की उपज खरीदने का लक्ष्य रखा है. सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में और अधिक किसान इस खेती से जुड़ेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी. 

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