अब सैटेलाइट देखेगा खेत, AI बताएगा हाल! Google की मदद से बदल रही खेती की झलक

अब सैटेलाइट देखेगा खेत, AI बताएगा हाल! Google की मदद से बदल रही खेती की झलक

Google DeepMind के AI मॉडल अब खेती को स्मार्ट बनाने में मदद कर रहे हैं. सैटेलाइट तस्वीरों से खेतों की पहचान, फसल की स्थिति, मौसम, पानी और कीटों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है. इससे किसानों को बेहतर फसल सलाह, कृषि लोन और पानी के सही इस्तेमाल में मदद मिल सकती है. यह तकनीक अब भारत के साथ दूसरे देशों तक भी पहुंच रही है.

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अब सैटेलाइट देखेगा खेत, AI बताएगा हाल! Google की मदद से बदल रही खेती की झलकअब AI बताएगा खेत का हाल!

खेती को आसान और बेहतर बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. Google DeepMind ने ऐसे दो AI मॉडल तैयार किए हैं, जो खेतों और फसलों के बारे में जरूरी जानकारी जुटाने में मदद करते हैं. इन मॉडल की मदद से खेत की सीमा पता लगाई जा सकती है, फसल में होने वाली परेशानी को समझा जा सकता है और किसानों को सही समय पर सलाह देने में मदद मिल सकती है. इन AI मॉडल को सबसे पहले भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था. अब इनका इस्तेमाल भारत के साथ-साथ एशिया और अफ्रीका के कई देशों में भी किया जा रहा है. इनके जरिए खेती से जुड़ी जानकारी को समझना आसान हो रहा है, जिससे किसान, सरकार, बैंक और कृषि से जुड़ी कंपनियां बेहतर फैसले ले सकती हैं.

कैसे काम करते हैं Google के ये AI मॉडल?

Google DeepMind के दो मॉडल Agricultural Landscape Understanding (ALU) और Agricultural Monitoring & Event Detection (AMED) खेती में काम आ रहे हैं. ये मॉडल सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों और जानकारी का इस्तेमाल करते हैं. आसान भाषा में समझें तो सैटेलाइट ऊपर से खेतों की तस्वीर लेता है. AI इन तस्वीरों को देखकर यह समझने में मदद करता है कि खेत कहां है, उसकी सीमा कितनी है और वहां खेती में क्या बदलाव हो रहे हैं. इससे खेतों की जानकारी जुटाने के लिए हर जगह जाकर जांच करने की जरूरत कम हो सकती है.

किसानों को फसल की परेशानी का पहले पता चलेगा

AI की मदद से खेतों में फसल पर पड़ने वाले मौसम के असर और दूसरी समस्याओं को समझने में मदद मिल सकती है. तेलंगाना में इस तकनीक का इस्तेमाल Krishivaas नाम के ऐप के एक पायलट प्रोजेक्ट में किया जा रहा है. इससे किसानों को उनके इलाके के हिसाब से फसल की सलाह देने की कोशिश की जा रही है. इसमें फसल में तनाव, मौसम में होने वाले बदलाव और स्थानीय स्तर पर कीटों के हमले जैसी जानकारी शामिल हो सकती है. यानी किसान को अपने खेत और अपने इलाके के हिसाब से ज्यादा सही सलाह मिल सकेगी.

किसानों को लोन दिलाने में भी मदद

खेती के लिए किसान को कई बार बैंक से लोन की जरूरत होती है. लेकिन बैंक के लिए खेत और खेती से जुड़ी सही जानकारी जुटाना आसान नहीं होता. इसके लिए कई बार अधिकारियों को खेत पर जाकर जांच करनी पड़ती है. Terrastack ने Google के ALU और AMED मॉडल की मदद से एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है, जो अब तक 14 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि को मैप कर चुका है. इससे खेतों की जानकारी जुटाने में समय कम लग सकता है और बैंक, बीमा कंपनियां और दूसरी संस्थाएं किसानों के बारे में ज्यादा सही फैसला ले सकती हैं. इसका फायदा यह हो सकता है कि सही किसान तक कृषि लोन और दूसरी सेवाएं जल्दी पहुंचें.

धान की खेती को ज्यादा eco-friendly बनाने की कोशिश

AI का इस्तेमाल खेती को पर्यावरण के लिए बेहतर बनाने में भी किया जा रहा है. CarbonFarm नाम की संस्था Google के ALU मॉडल और Gemini की मदद से खेतों की जानकारी जुटा रही है. इसका एक बड़ा लक्ष्य चावल की खेती में पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करना है. संस्था साल 2030 तक 20 लाख हेक्टेयर कम-कार्बन वाली चावल की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है. AI की मदद से खेत की सीमा को समझने और खेती के तरीकों की निगरानी करने में मदद मिलती है. इससे यह पता लगाने में भी मदद मिल सकती है कि किसान पर्यावरण को नुकसान कम करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं.

पानी बचाने में भी AI की मदद

खेती के लिए पानी बहुत जरूरी है, लेकिन पानी की उपलब्धता हर जगह एक जैसी नहीं होती. ऐसे में पानी का सही इस्तेमाल करना जरूरी है. कर्नाटक के जल संसाधन विभाग ने भी Google के ALU और AMED मॉडल का इस्तेमाल शुरू किया है. इन AI मॉडल को स्थानीय मौसम, सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी और दूसरी जानकारियों के साथ जोड़ा जा रहा है. इससे करीब 26 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में पानी के इस्तेमाल को बेहतर तरीके से समझने और प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है. इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किस इलाके में पानी की ज्यादा जरूरत है और कहां पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है.

भारत की तकनीक अब दूसरे देशों तक पहुंचेगी

इन AI मॉडल को भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया था, लेकिन अब इनका इस्तेमाल दूसरे देशों में भी बढ़ रहा है. एशिया और अफ्रीका के 11 देशों में इनके नतीजों को भरोसेमंद टेस्टिंग पार्टनर्स के साथ साझा किया गया है. इन मॉडल से मिलने वाली जानकारी को Google Earth और API के जरिए उपलब्ध कराया गया है. बताया गया है कि ALU का डेटा लेयर Google Earth पर दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले लेयर्स में शामिल है. इसका मतलब है कि भारत में तैयार हुई यह तकनीक अब दूसरे देशों की खेती में भी काम आ सकती है.

FAO भी करेगा AI मॉडल का इस्तेमाल

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन यानी FAO की नई पहल geoAI4stats में भी ALU और AMED को शामिल करने की योजना है. इसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग देशों में खेती से जुड़ी बेहतर और ज्यादा सटीक जानकारी जुटाना है. इस जानकारी से सरकारों को फसल, खेती और खाद्य सुरक्षा से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकती है. इससे यह भी समझने में आसानी होगी कि किसी देश या इलाके में खेती की स्थिति कैसी है और कहां ज्यादा मदद की जरूरत है.

खेती के लिए क्यों खास है यह तकनीक?

दुनिया में लोगों की संख्या बढ़ रही है और आने वाले समय में ज्यादा भोजन की जरूरत होगी. ऐसे में खेती को ज्यादा मजबूत बनाना जरूरी है. इसके लिए सिर्फ खेती का उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि पानी बचाना, मौसम की मार से फसल को बचाना, किसानों तक लोन पहुंचाना और खेती को पर्यावरण के लिए बेहतर बनाना भी जरूरी है. Google के इन AI मॉडल की मदद से खेती से जुड़ी जानकारी जल्दी और सही तरीके से जुटाने की कोशिश की जा रही है. अगर इसका इस्तेमाल बड़े स्तर पर सफल होता है, तो किसानों को बेहतर फसल सलाह, आसान कृषि सेवाएं और वित्तीय मदद मिलने में सहायता मिल सकती है. यानी आने वाले समय में AI सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेतों में भी किसानों का साथी बन सकता है.

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