Explainer: 9 सालों में 'कृषि क्रांति' का जीवंत दस्तावेज लिखता उत्तर प्रदेश, पढ़िए इनसाइड स्टोरी...

Explainer: 9 सालों में 'कृषि क्रांति' का जीवंत दस्तावेज लिखता उत्तर प्रदेश, पढ़िए इनसाइड स्टोरी...

Agriculture News of UP: कृषि के दिशा में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. फल, सब्जी, दुग्ध, आलू, आम, मटर, मेंथा और शहद उत्पादन में प्रदेश का देश में प्रथम स्थान इस बात का संकेत है कि अब खेती केवल परंपरागत फसलों तक सीमित नहीं रही. प्रति वर्ष 400 लाख टन फल और सब्जियों का उत्पादन, यह दर्शाता है कि किसानों ने बाजार की मांग के अनुरूप खुद को ढाला है. 

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Explainer: 9 सालों में 'कृषि क्रांति' का जीवंत दस्तावेज लिखता उत्तर प्रदेश, पढ़िए इनसाइड स्टोरी...उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश की कृषि यात्रा पिछले नौ वर्षों में एक मौन क्रांति का साक्षी बनी है. ऐसी क्रांति, जिसमें न कोई शोर है, न कोई दिखावा, लेकिन परिणाम अत्यंत व्यापक और स्थायी हैं. यह परिवर्तन केवल खेतों की हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसान के जीवन में आए आत्मविश्वास, उसकी बढ़ती आय और उसके चेहरे की मुस्कान में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. आज उत्तर प्रदेश का किसान केवल अन्नदाता नहीं रहा, वह एक उद्यमी बन चुका है, तकनीक से लैस, बाजार से जुड़ा और भविष्य के प्रति आश्वस्त. वह जानता है कि उसकी मेहनत का मूल्य मिलेगा, उसकी फसल सुरक्षित है और उसकी आय के नए स्रोत निरंतर खुल रहे हैं. यह कृषि क्रांति बताती है कि जब नीति और नीयत दोनों स्पष्ट हों, जब किसान को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जाएं और जब हर स्तर पर पारदर्शिता और प्रतिबद्धता हो तो परिणाम केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के जीवन में दिखाई देते हैं.

पिछली सरकारों में किसानों की नहीं बदली किस्मत

यह विडंबना ही है कि पिछली सरकारों में किसानों की बातें तो खूब हुई, वायदे हुए, घोषणाएं हुईं, लेकिन अन्नदाता की किस्मत न बदली. जिसने सुबह तीन बजे उठकर खेत जोता, जिसने अपनी पीठ के पसीने से इस देश का अन्न उपजाया, उसी की थाली कई बार रिक्त नजर आईं. कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या की खबरें दिल को दहलाती रहीं. वहीं गन्ने का भुगतान महीनों अटका रहता, नहरें सूखी पड़ी रहतीं और किसान विवशता में अपनी फसल सड़कों पर फेंकने को मजबूर होता. उधर, 2017 में मुख्यमंत्री बनने पर योगी आदित्यनाथ को यही स्थितियां विरासत में मिली थीं. इसमें परिवर्तन तभी संभव था जबकि किसान को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए और योगी सरकार ने अपना जो पहला फैसला लिया, वह किसानों के सम्मान की पुनर्स्थापना थी.

लघु एवं सीमांत किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये माफ

86 लाख से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का फसली ऋण माफ कर सरकार ने संदेश दे दिया कि वह उनके साथ खड़ी है. यह कदम सिर्फ राहत पहुंचान वाला भर नहीं था। यह किसानों के लिए संदेश था कि अब ऐसी सरकार है जिस पर वे भरोसा कर सकते हैं. पिछले नौ सालों में उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में जो बदलाव आया, वह केवल योजनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि दृष्टिकोण का परिवर्तन है. किसान को ‘लाभार्थी’ नहीं, बल्कि ‘विकास के केंद्र’ के रूप में है. ‘बीज से बाजार तक’ की सोच ने खेती को समग्र रूप में देखा. बीज, सिंचाई, वित्त, तकनीक, विपणन और मूल्य हर स्तर पर सुधार की ठोस पहल हुई.

कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये बजट 

यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश की कृषि कहानी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी बन चुकी है. यह आत्मनिर्भरता सरकार के हर बजट के साथ आगे बढ़ती रही. 2026-27 के बजट को ही देखें तो सरकार की किसानों के प्रति प्राथमिकता स्पष्ट हो जाती है. इस बजट में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है जो पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है. तुलनात्मक रूप से देखने पर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में हुआ अभूतपूर्व विस्तार और स्पष्ट हो जाता है. 2016-17 में जहां कृषि जीडीपी लगभग 2.96 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर 6.95 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई.

कृषि विकास दर में 18 प्रतिशत वृद्धि

यह वृद्धि केवल संख्यात्मक नहीं, बल्कि उस किसान की आय, उसकी क्रय शक्ति और उसके जीवन स्तर में आए परिवर्तन का संकेत है. देश की कुल कृषि योग्य भूमि का केवल 11 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत योगदान यह बताने के लिए पर्याप्त है कि उत्तर प्रदेश ने अपनी क्षमता का किस हद तक उपयोग किया है. खाद्यान्न उत्पादन में 32 प्रतिशत की वृद्धि और कृषि विकास दर का 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंचना इस परिवर्तन की गति का प्रत्यक्ष प्रमाण है. प्रत्यक्ष आय सहायता योजनाओं ने भी किसान की आय को स्थिरता प्रदान की.

3.12 करोड़ किसानों को मिला सम्मान निधि का लाभ

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के 3.12 करोड़ किसानों को 99,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि 22 किस्तों में सीधे उनके खातों में भेजी गई. यह न केवल देश में सर्वाधिक है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की गई. इसी प्रकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 353.14 लाख बीमित किसानों को 5,660 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति दी गई, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के समय किसान को सुरक्षा कवच मिला. किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 492 लाख से अधिक किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया गया, जबकि 2017 से 2025 के बीच 13.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक का फसली ऋण वितरण हुआ. यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि कृषि क्षेत्र में निवेश और विश्वास दोनों बढ़े हैं.

3.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान

उत्तर प्रदेश की कृषि क्रांति का सबसे सशक्त अध्याय गन्ना किसान हैं. एक समय था जब गन्ना किसानों को वर्षों तक अपने भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता था. बकाया, शोषण और अनिश्चितता उनकी नियति बन चुकी थी. लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. अप्रैल 2017 से फरवरी 2025 तक 3.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया, जो 2007 से 2017 के बीच हुए 1.47 लाख करोड़ रुपये के भुगतान से दोगुना से भी अधिक है और वह भी कम समय में. गन्ना क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.61 लाख हेक्टेयर हो गया है और उत्पादकता 72 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 83.25 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है.

गन्ना मूल्य और एथेनॉल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान

देश के कुल गन्ना उत्पादन में 57.26 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ उत्तर प्रदेश निर्विवाद रूप से अग्रणी है. वहीं 400 रुपये प्रति कुंतल का गन्ना मूल्य और एथेनॉल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान यह दर्शाता है कि कैसे कृषि को उद्योग से जोड़कर अतिरिक्त आय के स्रोत बनाए गए. वहीं कृषि क्षेत्र का विकास बहुआयामी है. अगर सिंचाई की बात करें तो पहले किसान मानसून पर निर्भर रहता था, वहीं अब नहरों, सोलर पंप और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था मजबूत हुई है. सिंचाई क्षमता 82 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 105 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. 1,309 परियोजनाओं के माध्यम से नई सिंचाई क्षमता का सृजन और 241 लाख से अधिक किसानों को लाभ, यह उस परिवर्तन का प्रमाण है जिसने बुंदेलखंड और विंध्य जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी हरियाली लौटाई.

प्रति वर्ष 400 लाख टन फल और सब्जियों का उत्पादन

कृषि के दिशा में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. फल, सब्जी, दुग्ध, आलू, आम, मटर, मेंथा और शहद उत्पादन में प्रदेश का देश में प्रथम स्थान इस बात का संकेत है कि अब खेती केवल परंपरागत फसलों तक सीमित नहीं रही. प्रति वर्ष 400 लाख टन फल और सब्जियों का उत्पादन, यह दर्शाता है कि किसानों ने बाजार की मांग के अनुरूप खुद को ढाला है. आज का किसान ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करता है और ई-मंडी के माध्यम से देशभर के बाजारों से जुड़ता है.

बिचौलियों की भूमिका कम हुई

इसे प्रशिक्षित करने के लिए पाठशालाएं हैं. 1.71 लाख से अधिक ई-लाइसेंस और 6.42 करोड़ से अधिक ऑनलाइन पर्चियों के माध्यम से मंडियों में पारदर्शी व्यापार सुनिश्चित हुआ है जिसमें बिचौलियों के लिए जगह नहीं है. इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिलना शुरू हुआ है. पशुधन और दुग्ध उत्पादन से श्वेत क्रांति का नया अध्याय लिखा जा रहा है.

जलवायु परिवर्तन को लेकर उठाया बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश, जो कभी संभावनाओं के बावजूद पिछड़ता था, आज अपने अन्नदाता के साथ देश का अन्नभंडार बनकर खड़ा है. यह यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है, आने वाले वर्षों में यही अन्नदाता, यही विधाता, उत्तर प्रदेश को न केवल कृषि में, बल्कि समग्र विकास में भी देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर दिखाई देगा. हालांकि कुछ चुनौतियां भी हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता, वैश्विक बाजार की अस्थिरता जैसे कारक सामने आएंगे जिनका समाधान खोजना होगा.

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