लाडकी बहिण योजनामहाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति सरकार की प्रमुख योजना को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक अमोल मिटकरी ने मंगलवार को मांग की कि मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना का नाम दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नाम पर रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अजित दादा महिलाओं के बीच बेहद लोकप्रिय थे और राज्यभर के दौरों के दौरान उनके हाथ रक्षासूत्रों से भरे रहते थे. ऐसे में अगर योजना का नाम ‘अजितदादांची लाडकी बहिण योजना’ किया जाता है तो यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
मिटकरी ने यह भी याद दिलाया कि इस योजना की परिकल्पना और घोषणा खुद अजित पवार ने वित्त मंत्री रहते हुए की थी और इसे जुलाई 2024 में लागू किया गया. योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की पात्र महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस योजना ने 2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति की जीत में अहम भूमिका निभाई थी.
इस बीच, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ किया है कि सरकार इस योजना को बंद करने पर विचार नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को मिल रही मासिक सहायता से जमीनी स्तर पर बड़ा लाभ हो रहा है और सही समय आने पर राशि 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये की जाएगी.
मालूम हो कि बुधवार 28 जनवरी को उप मुख्यमंत्री अजित पवार की एक विमान हादसे में असमय मृत्यु हो गई थी. बारामती क्षेत्र में हुए इस हादसे में अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की जान चली गई. जैसे ही यह खबर सामने आई, पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई और राजनीतिक गतिविधियां कुछ समय के लिए थम सी गईं.
शुरुआत में पुणे ग्रामीण पुलिस ने इसे आकस्मिक मृत्यु का मामला मानते हुए जांच शुरू की, लेकिन बाद में केस महाराष्ट्र अपराध जांच विभाग को सौंप दिया गया. सीआईडी अब हादसे से जुड़े तकनीकी कारणों, विमान की स्थिति और सुरक्षा पहलुओं की गहन जांच कर रही है.
बता दें कि अजित पवार का राजनीतिक सफर संघर्ष, फैसलों और बदलावों से भरा रहा. वे कई दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहे और अपने मजबूत प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते थे. 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में आए बड़े उलटफेर में उनकी भूमिका निर्णायक रही.
जून 2023 में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर नया रास्ता चुना और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में उप मुख्यमंत्री बने. इसके बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिला, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी. (पीटीआई)
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