VB-G RAM G के तहत पशुपालन और चारा उत्पादन को बढ़ावा, केंद्र ने 22 कामों को दी प्राथमिकता

VB-G RAM G के तहत पशुपालन और चारा उत्पादन को बढ़ावा, केंद्र ने 22 कामों को दी प्राथमिकता

केंद्र सरकार ने VB-G RAM G अधिनियम के तहत पशुपालन और चारा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है. इसमें चारा उत्पादन, चारागाह विकास, पशु आश्रय, दूध संग्रह केंद्र और पशु चिकित्सा सुविधाओं सहित 22 तरह के कार्यों को प्राथमिकता दी गई है.

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VB-G RAM G के तहत पशुपालन और चारा उत्पादन को बढ़ावा, केंद्र ने 22 कामों को दी प्राथमिकतापशुपालन और चारा उत्‍पादन को बढ़ावा (AI Image)

गांवों में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल की है. अब ग्रामीण रोजगार योजना के तहत सिर्फ मजदूरी वाले काम ही नहीं होंगे, पशुओं के लिए चारे का इंतजाम करने से लेकर उनके रहने और इलाज की सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा. केंद्र सरकार ने इसके लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है. इसमें चारा उत्पादन, चारागाह विकास और पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 22 तरह के कार्यों को प्राथमिकता दी गई है.

पशुओं के चारे की समस्या दूर करने पर फोकस

कई ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों के सामने सालभर हरे और पौष्टिक चारे की उपलब्धता बड़ी चुनौती रहती है. इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र ने VB-G RAM G अधिनियम के तहत खेतों और सामुदायिक जमीन पर चारा उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है. इसमें व्यक्तिगत किसानों के खेतों में चारा उगाने, सामुदायिक चारा संसाधन विकसित करने, चारागाह और चराई भूमि तैयार करने जैसे काम शामिल हैं. इसके अलावा चारा बैंक और साइलेज यूनिट भी बनाई जा सकेंगी, ताकि चारे की कमी के समय पशुओं को पर्याप्त आहार मिल सके.

गांवों में बनेंगे पशु आश्रय और दूध संग्रह केंद्र

एडवाइजरी में पशुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं तैयार करने पर भी खास जोर दिया गया है. इसके तहत पशु आश्रयों का निर्माण, पुराने आश्रयों की मरम्मत और रखरखाव किया जा सकेगा. गांवों में सामुदायिक दूध संग्रह केंद्र, पशु चिकित्सा केंद्र और पशुओं के लिए पानी पीने की नांद भी बनाई जा सकेंगी. व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए एजोला टैंक बनाने का काम भी इसमें शामिल है. एजोला पशुओं के लिए पौष्टिक पूरक आहार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

पशुपालन पर निर्भर गांवों को मिलेगी प्राथमिकता

केंद्र ने राज्यों को सलाह दी है कि वे उन ग्राम पंचायतों में चारा और पशुपालन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दें, जहां 30 फीसदी से अधिक आबादी की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है. साथ ही राज्यों को धीरे-धीरे VB-G RAM G कार्यक्रम के कुल खर्च का कम से कम 5 फीसदी हिस्सा चारा विकास और पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. यह खर्च स्थानीय जरूरतों और स्वीकृत योजनाओं के आधार पर किया जाएगा.

VB-G RAM G अधिनियम 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ है. इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है. इस कानून का उद्देश्य रोजगार उपलब्ध कराने के साथ गांवों में ऐसी टिकाऊ परिसंपत्तियां तैयार करना है, जो लंबे समय तक ग्रामीण आजीविका को मजबूत करें. पशुपालन और चारा विकास से जुड़े कार्यों को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है.

ग्राम सभा तय करेगी गांव में कौन से काम जरूरी

केंद्र ने स्पष्ट किया है कि इन कार्यों की योजना ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार की जाएगी. इन्हें विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं में शामिल किया जाएगा और ग्राम सभा की मंजूरी ली जाएगी. राज्यों को ग्रामीण विकास, कृषि और पशुपालन विभागों के बीच तालमेल बनाकर चारा सुरक्षा के लिए अलग एक्शन प्लान तैयार करने को भी कहा गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय घासभूमि एवं चारा अनुसंधान संस्थान की राज्यवार चारा विकास योजनाओं का इस्तेमाल भी इसके लिए किया जा सकेगा.

कामों में गड़बड़ी रोकने के लिए होंगे ये नियम

केंद्र ने साफ किया है कि चारा और पशुपालन से जुड़े सभी कार्य अधिनियम के नियमों के तहत ही किए जाएंगे. इनमें सामाजिक ऑडिट अनिवार्य होगा और सामग्री पर होने वाला खर्च जिला स्तर पर कुल खर्च के 40 फीसदी से अधिक नहीं हो सकेगा. व्यक्तिगत लाभार्थियों का चयन अधिनियम की अनुसूची-1 के अनुसार किया जाएगा. इसके अलावा खर्च और कार्यों की साप्ताहिक सार्वजनिक जानकारी देने तथा शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था भी लागू रहेगी.

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