मखाना अनुसंधान केंद्र का उद्घाटनकेंद्र सरकार की ओर से मखाना बोर्ड बनने के साथ ही बिहार में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में मखाना अनुसंधान केंद्र खोल दिया गया. इस केंद्र में मखाना की खेती करने वाले किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने किया. मंत्री ने कहा कि मखाना अब हर घर के लोगों की पसंद बन चुका है. मखाना हर घर में एक बेहतर डिश के रूप में शोभा बढ़ा रहा है.
केंद्रीय राज्य मंत्री ठाकुर ने कहा, शादी से लेकर छोटे-छोटे समारोह में मखाना परोसा जाता है. केंद्र की मोदी सरकार ने मखाना को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है. मखाना केंद्र के उद्घाटन के साथ ही विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी "मखाना अनुसंधान एवं विकास" का भी उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया. सेमिनार में बिहार के विभिन्न जिलों के मखाना किसान, देश भर के प्रसिद्ध मखाना अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक और छात्रों ने भाग लिया.
कार्यक्रम में मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय ने प्राकृतिक खेती, डिजिटल एग्रीकल्चर और दीक्षारंभ कार्यक्रम के जरिए देश भर को एक नई राह दिखाई है जिस पर अब अन्य विश्वविद्यालय चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि मखाना अनुसंधान के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय देश को एक नई राह दिखाएगा. उन्होंने कहा कि मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्ट केंद्र मखाना के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे किसानों और उद्यमियों को लाभ होगा.
बागवानी आयुक्त डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि कुलपति डॉ पांडेय पहले भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 65 विश्वविद्यालयों का अप्रत्यक्ष रूप से नेतृत्व कर रहे थे. उनके अनुभव का परिणाम है कि इस विश्वविद्यालय के दीक्षारंभ कार्यक्रम के साथ साथ की अन्य नवोन्मेषी कार्यों की चर्चा पूरे देश भर के कृषि वैज्ञानिकों के बीच होती है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को कुलपति को सहयोग करना चाहिए जिससे कि इस संस्थान को और उत्कृष्ट बना सकें. मखाना अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय संगोष्ठी वैज्ञानिकों, किसानों और उद्यमियों को ज्ञान और अनुभव साझा करने का एक मंच मुहैया करेगी, जिससे मखाना उद्योग के लिए नवाचारी समाधान निकलेंगे.
कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने कहा की विश्वविद्यालय में मखाना और इससे जुड़े क्षेत्र में तेज अनुसंधान के लिए 17 वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई है जो मखाना के पूरे वैल्यू चेन पर काम करेगी. इस टीम में मखाना से जुड़े कृषि वैज्ञानिकों के साथ साथ कृषि अभियांत्रिकी, प्रबंधन, विपणन और प्रसार के वैज्ञानिकों को भी शामिल किया गया है ताकि मखाना के बीज उत्पादन, किसानों को प्रशिक्षण, मखाना से जुड़े नए यंत्रों का निर्माण, पैकेजिंग और निर्यात जैसे सभी विषयों पर एकरूपता और समग्रता से काम हो सके.
कुलपति ने कहा कि मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्ट केंद्र का उद्घाटन विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह केंद्र मखाना में उन्नत अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिससे किसानों और उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके. निदेशक अनुसंधान, डॉ ए के सिंह ने कहा कि मखाना अनुसंधान एवं विकास केंद्र मखाना पर उन्नत अनुसंधान को सुविधाजनक बनाएगा, जिसमें प्रभेद सुधार, उत्पादन तकनीक और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन शामिल हैं. इससे मखाना की क्वालिटी और उपज में वृद्धि होगी, जिससे किसानों और उद्योग को आर्थिक लाभ होगा.
ए के सिंह ने कहा कि कुलपति डॉ पांडेय ने मखाना को लेकर एक जंबो टीम बनाई है जिसमें कृषि से संबंधित लगभग सभी विषयों के वैज्ञानिक शामिल हैं. उन्होंने कहा कि कुलपति को इस टीम से बड़ी आशा है और टीम पर पूरा विश्वास है, इसलिए उनके विश्वास को पूरा करने के लिए एकजुट होकर लगातार काम करना होगा. उन्होंने कहा कि कुलपति मखाना की उत्पादकता को दो गुना करना चाहते हैं, इसके लिए सभी वैज्ञानिकों को काम करना होगा.
कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से आए लगभग तीन सौ से अधिक किसानों, देश भर से मखाना अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक और विश्वविद्यालय के छात्रों ने भाग लिया. दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मखाना अनुसंधान और विकास के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी सत्र, पेपर प्रस्तुति और चर्चा हुई. इस कार्यक्रम में देश भर के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, किसान और उद्यमियों ने भाग लिया.(जहांगीर आलम का इनपुट)
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