बिहार की महिला जनप्रतिनिधि बदल रहीं गांवों की तस्वीर, स्वास्थ्य से शिक्षा तक बना रहीं नई पहचान

बिहार की महिला जनप्रतिनिधि बदल रहीं गांवों की तस्वीर, स्वास्थ्य से शिक्षा तक बना रहीं नई पहचान

बिहार की महिला मुखिया, वार्ड सदस्य और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं पंचायतों में बदलाव की नई मिसाल पेश कर रही हैं. कहीं टीबी मुक्त पंचायत बनाने की पहल हो रही है तो कहीं बाल विवाह रोककर बेटियों को दोबारा स्कूल भेजा जा रहा है. स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आजीविका के क्षेत्र में महिलाओं का नेतृत्व ग्रामीण विकास को नई दिशा दे रहा है.

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बिहार की महिला जनप्रतिनिधि बदल रहीं गांवों की तस्वीर, स्वास्थ्य से शिक्षा तक बना रहीं नई पहचानबिहार की पंचायतों में महिलाओं का कमाल

बिहार की पंचायतों में महिलाएं अब केवल जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी नहीं निभा रहीं, बल्कि गांवों की समस्याओं का समाधान निकालने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं. कहीं टीबी मरीजों की मदद से स्वस्थ पंचायत बनाने की कोशिश हो रही है, तो कहीं गरीब परिवारों की आमदनी बढ़ाने और बेटियों को बाल विवाह से बचाकर स्कूल तक पहुंचाने की मुहिम चल रही है. पंचायतों में महिलाओं को मिला नेतृत्व का अवसर अब जमीनी बदलाव की कहानियों में नजर आने लगा है.

स्थानीय निकायों और पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने के फैसले के बाद उनकी भागीदारी बढ़ी है. मुजफ्फरपुर से नालंदा और दरभंगा तक महिला मुखिया, वार्ड सदस्य और जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम कर रही हैं.

टीबी मरीजों की मदद से स्वस्थ पंचायत बनाने की पहल

मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड की पैगंबरपुर पंचायत की मुखिया प्रियंका कुमारी ने पंचायत को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया है. उन्होंने पंचायत की बैठकों में टीबी की रोकथाम और मरीजों की देखभाल को प्राथमिकता दी. चिन्हित मरीजों को गोद लेकर उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की पहल भी की. इस प्रयास का मकसद मरीजों को इलाज के दौरान सहयोग देना और बीमारी से जुड़े सामाजिक संकोच को कम करना है.

प्रियंका की पहल बताती है कि पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को प्राथमिकता देकर लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया जा सकता है. स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता से स्वास्थ्य जागरूकता को भी बढ़ावा मिलता है.

नालंदा की तेल्हारा पंचायत में आजीविका से गरीबी पर चोट

नालंदा जिले की तेल्हारा पंचायत में मुखिया प्रतिमा देवी ने ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती और पशुपालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया. पंचायत में करीब 150 परिवार बकरीपालन से जुड़े हैं, जबकि 450 से अधिक लोग दुग्ध व्यवसाय करते हैं. इसके अलावा सूअर, मुर्गी और मधुमक्खी पालन भी आजीविका के साधन हैं.

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कपड़े, चमड़े के जैकेट, एल्युमीनियम के बर्तन, पेपर प्लेट और मशरूम उत्पादन जैसे कामों में लगी हैं. इन गतिविधियों ने महिलाओं को कमाई के अवसर दिए हैं. स्थानीय बाजार से बाहर भी उत्पादों की पहुंच बनने से पंचायत में उद्यमिता को बढ़ावा मिला है.

बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को बनाया प्राथमिकता

मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड की बाघा खाल पंचायत में मुखिया विभा कुमारी ने बच्चों की शिक्षा और अधिकारों पर ध्यान दिया. उन्होंने तीन स्कूलों में बाल संसद और दो स्कूलों में ग्रीन क्लब स्थापित कराने की पहल की. रात्रि चौपाल और नुक्कड़ नाटकों के जरिए बाल विवाह, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरुकता फैलाई गई. इस प्रयास के बाद स्कूल छोड़ चुके 17 बच्चों का दोबारा नामांकन कराया गया.

दरभंगा के बिरौल प्रखंड की लदहो पंचायत में वार्ड सदस्य फूल कुमारी देवी ने भी अपने स्तर पर बदलाव की पहल की. अशिक्षित होने के बावजूद उन्होंने स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम किया. सुनसान रास्ते पर महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा को लेकर उन्होंने स्थानीय पुलिस से नियमित गश्त की व्यवस्था कराने का आग्रह किया.

स्कूल में सैनिटरी पैड मशीन, महिलाओं की सामूहिक पहल

लदहो पंचायत में महिला जनप्रतिनिधियों ने स्कूल में सैनिटरी पैड की उपलब्धता की समस्या उठाई. उनके सामूहिक प्रयास के बाद मिडिल स्कूल में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और सुरक्षित निस्तारण इकाई लगाई गई. यह पहल छात्राओं की जरूरतों को पंचायत के एजेंडे में शामिल करने का उदाहरण है.

बाल विवाह रोककर बेटियों की पढ़ाई जारी रखने में मदद

मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड में महिला जनप्रतिनिधियों और जीविका समूहों ने दो किशोरियों की पढ़ाई बचाने में अहम भूमिका निभाई. पोखरेरा गांव में 15 वर्षीय नंदनी की शादी कराने की तैयारी थी. वार्ड सदस्य मीना देवी ने उसके परिवार को पढ़ाई जारी रखने के लिए समझाया. वहीं बहिलवारा रूपनाथ उत्तरी गांव में आर्थिक तंगी के कारण 15 वर्षीय सोनम पर शादी का दबाव था. वार्ड सदस्य फूलकुमारी देवी और जीविका समूह के प्रयास से परिवार राजी हुआ और सोनम दोबारा स्कूल जाने लगी.

स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन के मोर्चे पर बिहार की ये महिला जनप्रतिनिधि समाज को सशक्त बना रही हैं. यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि जब महिलाओं को समान अवसर और अधिकार मिलते हैं, तो वे पूरे समाज की तस्वीर बदलने का सामर्थ्य रखती हैं.

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