अब किसान जो अन्नदाता, ऊर्जादाता हैं, वे बिटुमेनदाता बन जाएंगे. (वीडियो ग्रैब)धान की पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ने के मामलों ने बीते कुछ वर्षों में काफी तूल पकड़ा है. लेकिन, बीते माह सीएसई और आईआईटी की रिपोर्ट से पता चला है कि दिल्ली में प्रदूषण की असली वजह पराली न होकर वाहनों का धुआं और स्थानीय कारण हैं. धान की पराली को जलाने से रोकने के लिए खाद समेत कई तरह के प्रोडक्ट बनाने पर जोर दिया जा रहा है. इस बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वह चावल की भूसी से सीएनजी बना रहे हैं, जो प्रदूषण को कम करने में सहायक है. उन्होंने कहा कि किसान अन्नदाता हैं और वह अब ऊर्जा के साथ ही बॉयो बिटुमेनदाता भी बनेंगे.
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के नागपुर एनएच-44 पर भारत के पहले बायो-बिटुमेन आधारित राष्ट्रीय राजमार्ग खंड का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की वजह से दिल्ली में प्रदूषण की समस्या है. अब हम चावल के भूसे से सीएनजी बना रहे हैं. अब किसान जो अन्नदाता, ऊर्जादाता हैं, वे बिटुमेनदाता बन जाएंगे. इससे कचरे से मूल्य सृजन में मदद मिलेगी और किसानों को भी लाभ होगा.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश में बायोमास से सीएनजी बनाने की 400 परियोजनाएं चल रही हैं. सीएनजी पेट्रोल से काफी सस्ती है और सीएनजी से होने वाला प्रदूषण भी पेट्रोल की तुलना में काफी कम है. सीएनजी से काफी पैसे की बचत होती है. इससे किसानों को काफी फायदा होगा. धान की पराली से खाद, पशु आहार समेत कई तरह के उत्पाद बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
पराली और चावल की भूसी के जरिए बॉयो बिटुमेन बनाया जा रहा है, जो सीएनजी बनाने में मदद करता है. बिटुमेन एक चिपचिपा, काला, पेट्रोलियम आधारित लिक्विड होता है, जिसके कई इंडस्ट्रियल इस्तेमाल हैं. बिटुमेन का उपयोग सड़कों, राजमार्गों, हवाई अड्डे के रनवे, पार्किंग स्थल और फुटपाथ के निर्माण में किया जाता है. इसके साथ ही बिटुमेन का इस्तेमाल छतों, बेसमेंट, पुल आदि में भी किया जाता है.
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