Farmer Protest: नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च, 30 हजार किसान सड़कों पर, 2–3 फरवरी को 'धावा'

Farmer Protest: नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च, 30 हजार किसान सड़कों पर, 2–3 फरवरी को 'धावा'

महाराष्ट्र में एक बार फिर किसानों का नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च शुरू हुआ है. CPM के नेतृत्व में 30 हजार किसान महीने भर का राशन लेकर मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं. कर्जमाफी, जमीन के अधिकार, शक्तिपीठ हाईवे और स्मार्ट मीटर योजना रद्द करने समेत कई मांगों को लेकर यह आंदोलन 2–3 फरवरी को मुंबई पहुंचेगा.

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नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च, 30 हजार किसान सड़कों पर, 2–3 फरवरी को 'धावा'नासिक से मुंबई तक किसानों का लॉन्ग मार्च

किसान एक बार फिर नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च पर निकले हैं. महीने भर के राशन के साथ 30 हजार लोगों का लॉन्ग मार्च 25 जनवरी को मुंबई की ओर रवाना हुआ. किसानों का यह दल 2 से 3 फरवरी के बीच मुंबई में दाखिल होगा. इस मार्च को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने आयोजित किया है. यह लॉन्ग मार्च मंगलवार को घाटनदेवी (इगतपुरी) से कसारा घाट पार करके मुंबई की ओर बढ़ेगा. लगभग 40 किमी की दूरी तय कर यह लॉन्ग मार्च ठाणे जिले के शहापूर के पास खर्डी के पास रुकेगा, जबकि किसानों का डेलीगेशन मुंबई में कैबिनेट मीटिंग के बाद बातचीत करेगा.

CPM की अगुवाई में लॉन्ग मार्च

सीपीएम ने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने 2018,2018 और 2023 में नासिक जिले में हुए रोड ब्लॉक प्रोटेस्ट और लॉन्च मार्च के बाद भी किसानों और मजदूरों की मांगों को मान तो लिया, लेकिन उसपर बाद में कुछ भी नही हुआ. उन पेंडिंग मांगों को पूरा करने के लिए सोमवार सुबह 9 बजे नासिक से मुंबई की ओर एक बड़ा 'लॉन्ग मार्च' शुरू हुआ. मार्च को लीड करने वाले कॉमरेड जेपी गावित ने आरोप लगाया है कि पिछले लॉन्ग मार्च में मानी गई कोई भी मांग पूरी नहीं की गई है. 

गावित ने इशारे में कहा कि इस बार महीने भर का राशन लेकर आदिवासी निकले हैं. इस बार पूरी मांगें माने जाने के बाद ही आंदोलन खत्म होगा, नहीं तो विधानसभा का घेराव शुरू होकर रहेगा.

शक्तिपीठ हाईवे को लेकर विरोध

किसान सभा के नेता अजित नवले ने कहा कि लॉन्ग मार्च के बाद सरकार मांगें मान तो लेती है लेकिन उसे लागू करने से मुकर जाती है. CPM और किसान सभा आदिवासियों की जमीन की मांगों को लेकर आंदोलन कर रही है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और RSS का विकास अडाणी, अंबानी के लिए है. हम किसानों की कर्जमाफी की मांग करते हैं. सरकार शक्तिपीठ के नाम पर किसानों की जमीन कॉर्पोरेट को दे रही है.

ठाणे-पालघर जिलों में हुए 'लॉन्ग मार्च' और घेराव प्रोटेस्ट के बाद, वहां कुछ जरूरी लोकल मांगें मान ली गई हैं. हालांकि, राज्य लेवल की मांगें अभी भी पेंडिंग हैं. पिछले पांच दिनों से नासिक जिले के अलग-अलग तालुकों में फॉरेस्ट राइट्स एक्ट को अच्छे से लागू करने, समुद्र में बह रहे पानी को रोकने और उसे महाराष्ट्र के सूखे इलाकों और लोकल लोगों को दिलाने के लिए अनिश्चित समय के लिए दिन-रात आंदोलन चल रहा है.

राज्य लेवल की मांगें अभी तक नहीं मानी गई हैं. CPI(M) और बड़े संगठन इन सभी मांगों के लिए पूरे राज्य में लड़ रहे हैं और पार्टी ने लोगों से इसमें हिस्सा लेने की अपील की है.

नासिक से मुंबई की और जाते लॉंग मार्च ने पूरी शहर की यातायात ठप्प कर दी. ठाणे के भिवंडी शहर में इस मार्च में पालघर और अन्य जिलों के आंदोलनकारी भी शामिल होंगे. इस वजह से भारी ट्रैफिक जाम का अनुमान लगाया जा सकता है.

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें

  • वाधवन और मुरबे पोर्ट कैंसिल करें
  • शक्तिपीठ हाईवे कैंसिल करें
  • जंगल की जमीन, मंदिर की जमीन, वर्कास की जमीन और घरों के ग्राउंड फ्लोर मजदूरों के नाम करें
  • रोजगार गारंटी एक्ट में बदलाव करके मजदूरों के रोजगार के अधिकार को खत्म किया गया है, इस मामले में हो रहे अन्याय को दूर करें
  • स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली के बिल बढ़ाने वाली स्मार्ट मीटर स्कीम कैंसिल करें (प्रवीण ठाकरे की रिपोर्ट)
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