
किसानों से MSP खरीद में सिर्फ निर्धारित शुल्क लिया जाएहरियाणा में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली सरकारी खरीद के दौरान किसानों से अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है. कृषि वैज्ञानिक वीरेन्द्र लाठर ने हरियाणा सरकार को पत्र भेजकर आढ़तियों द्वारा किसानों से आकस्मिक शुल्क और मजदूरी शुल्क की वसूली पर स्पष्ट रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने सरकार से इस संबंध में मंडियों और आढ़तियों के लिए साफ दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है.
वीरेन्द्र लाठर ने अपने पत्र में कहा है कि MSP पर सरकारी खरीद के दौरान किसान से केवल निर्धारित शुल्क ही लिया जाना चाहिए. उनका कहना है कि 10 पैसे प्रति बैग बोली शुल्क के अलावा किसानों से किसी अन्य आकस्मिक शुल्क या मजदूरी शुल्क की वसूली नहीं होनी चाहिए. उन्होंने सरकार से मांग की है कि आढ़तियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ताकि MSP पर अपनी फसल बेचने वाले किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े.

कृषि वैज्ञानिक ने 17 सितंबर 2025 की हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) की अधिसूचना का हवाला देते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. HSAMB की संबंधित अधिसूचना में MSP पर सरकारी एजेंसी द्वारा खरीदी गई कृषि उपज के मामले में कई आकस्मिक शुल्क खरीदार द्वारा वहन किए जाने की बात कही गई है. इसमें सफाई और ड्रेसिंग से जुड़े कुछ शुल्कों के लिए आढ़ती की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है.
वीरेन्द्र लाठर ने सरकार से यह भी कहा है कि आकस्मिक शुल्क से संबंधित अधिसूचना और नियमों की जानकारी किसानों को सरल हिंदी में दी जाए. उनका कहना है कि केवल अंग्रेजी में जारी दस्तावेजों के कारण कई किसानों को यह समझने में परेशानी हो सकती है कि सरकारी खरीद के दौरान उनसे कौन-सा शुल्क लिया जा सकता है और कौन-सा नहीं. उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिसूचना की प्रति आढ़तियों की दुकानों और फर्मों पर प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाएं. साथ ही किसानों तक भी इसकी जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि वे अपने अधिकारों और निर्धारित शुल्क के बारे में आसानी से जान सकें.
लाठर ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी 19 अगस्त 2026 को इस मुद्दे को लेकर सरकार के सामने अपनी बात रखी थी. अब उन्होंने एक बार फिर पत्र भेजकर किसान हित में इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया है. उनका कहना है कि सरकारी खरीद के दौरान किसानों से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर किसी भी तरह की अस्पष्टता नहीं रहनी चाहिए. मंडियों में किसानों को पहले से स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उनकी फसल की सरकारी खरीद के दौरान कौन-कौन से शुल्क लागू हैं.
पत्र में कहा गया है कि खरीफ सीजन की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही हरियाणा सरकार इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे. इससे किसानों और आढ़तियों के बीच शुल्क को लेकर किसी तरह का विवाद पैदा होने से रोका जा सकेगा. गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने भी खाद्यान्न खरीद व्यवस्था से जुड़े शुल्कों और पैकेजिंग लागत के संबंध में समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अगस्त 2026 में केंद्र ने सरकारी खरीद में इस्तेमाल होने वाली पुरानी जूट की बोरियों के उपयोग शुल्क को KMS 2025-26 से 10.22 रुपये प्रति बोरी या राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश की वास्तविक लागत, जो भी कम हो, करने की घोषणा की थी. वीरेन्द्र लाठर ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि किसानों से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर स्पष्ट और आसान भाषा में आदेश जारी किए जाएं और MSP पर सरकारी खरीद के दौरान किसानों से निर्धारित शुल्क के अलावा किसी भी राशि की वसूली को लेकर स्थिति साफ की जाए.
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