किसानों-मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा देने की मांगहरियाणा में किसानों और खेतिहर मजदूरों से जुड़े एक संगठन ने हादसे की स्थिति में मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने की मांग की है. भारतीय किसान यूनियन (चरुणी) ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य के कृषि मंत्री समेत संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना, 2013 में बदलाव की मांग की है. संगठन का कहना है कि पिछले कई वर्षों में महंगाई और इलाज का खर्च बढ़ा है, लेकिन योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि में उसी हिसाब से बढ़ोतरी नहीं हुई है.
बीकेयू (चरुणी) के प्रवक्ता राकेश बैन्स ने कहा कि मौजूदा समय में कृषि मशीनरी चलाने के दौरान किसान या खेतिहर मजदूर की मौत होने पर परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये की सहायता मिलती है. संगठन ने इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद घर के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है, इसलिए सहायता राशि मौजूदा जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए.
किसान संगठन ने गंभीर चोट और स्थायी दिव्यांगता के मामलों में भी सहायता बढ़ाने की मांग की है. बीकेयू (चरुणी) के मुताबिक, रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में मिलने वाली 2.50 लाख रुपये की राशि को बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया जाना चाहिए. संगठन का कहना है कि ऐसी चोट के बाद किसान या मजदूर की काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और परिवार पर इलाज के साथ-साथ रोजमर्रा के खर्च का बोझ भी बढ़ जाता है.
ज्ञापन में शरीर के किसी अंग को नुकसान पहुंचने की स्थिति में मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाने की मांग भी की गई है. संगठन ने एक हाथ या पैर के नुकसान अथवा गंभीर स्थायी चोट के मामले में सहायता को 1.25 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग की है. वहीं, पूरी उंगली के नुकसान पर 2.50 लाख रुपये और उंगली के कुछ हिस्से के नुकसान पर 1.50 लाख रुपये की सहायता देने की मांग रखी गई है.
मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना, 2013 को 1 जनवरी 2014 से लागू किया गया था. इस योजना के तहत कृषि मशीनरी चलाने के दौरान मौत या दिव्यांगता होने पर किसानों और खेतिहर मजदूरों को आर्थिक सहायता दी जाती है. बीकेयू (चरुणी) का कहना है कि योजना लागू होने के बाद से महंगाई, मेडिकल खर्च और परिवार चलाने की लागत काफी बढ़ गई है. ऐसे में सहायता राशि की समीक्षा करना जरूरी है.
बीकेयू (चरुणी) ने योजना में सहायता पाने के लिए लागू उम्र की शर्त हटाने की मांग भी की है. फिलहाल 10 से 75 वर्ष की उम्र के लोग इस योजना के दायरे में आते हैं. संगठन का कहना है कि कृषि कार्य में हादसा किसी भी उम्र में हो सकता है. इसलिए उम्र की पाबंदी हटाकर किसान और खेतिहर मजदूर को हादसे की स्थिति में सहायता देने का प्रावधान किया जाना चाहिए.
किसान संगठन ने सरकार से योजना में जरूरी संशोधन करने और सहायता राशि को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बढ़ाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि किसान या खेतिहर मजदूर के साथ हादसा होने पर सिर्फ घायल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार आर्थिक परेशानी में आ जाता है. ऐसे में बढ़ी हुई सहायता राशि परिवार को संकट के समय आर्थिक सहारा दे सकती है.
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