कर्नाटक बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बी वाय विजयेंद्र (फाइल फोटो)कर्नाटक बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य सरकार से सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए तत्काल 10 हजार करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मदद का इंतजार करने के बजाय राज्य सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पहले किसानों को राहत उपलब्ध करानी चाहिए. उन्हाेंने कहा कि राज्य के 28 से ज्यादा जिले कम बारिश के कारण गंभीर सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं.
तुमकुरु जिले के विभिन्न गांवों का दौरा करने के बाद बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा ने राज्य में सूखे की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करने के लिए सात अध्ययन दल बनाए हैं. उन्होंने बताया कि इन दौरों का उद्देश्य किसानों की परेशानियों को सरकार के सामने रखना है. तुमकुरु जिले के लगभग सभी 10 तालुकों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है.
बीजेपी नेता बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि जिले में नारियल, रागी, फल और सब्जियों की खेती करने वाले किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. कई जगहों पर अब तक बुवाई शुरू नहीं हो सकी है, जबकि कुछ इलाकों में बोई गई फसलें अंकुरित नहीं हुईं और खराब हो गई हैं. उन्होंने मांग की कि तुमकुरु जिले के सभी तालुकों को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित किया जाए.
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि राज्यभर के किसान आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और खेती जारी रखना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में राज्य सरकार को 10 हजार करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज तुरंत जारी करना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र से सहायता मांगने की प्रक्रिया बाद में भी चल सकती है, लेकिन किसानों की सुरक्षा और राहत देना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है.
बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि मौजूदा हालात में कई किसानों के पास फसल बीमा प्रीमियम जमा करने की भी आर्थिक क्षमता नहीं है. इसलिए राज्य सरकार किसानों के हिस्से का बीमा प्रीमियम खुद वहन करे. उन्होंने तुमकुरु जिले के प्रत्येक तालुक को कम से कम 50 लाख रुपये जारी करने की भी मांग की, ताकि किसानों को बीमा प्रीमियम जमा करने में मदद मिल सके.
उन्होंने कहा कि हेमावती समेत प्रमुख जल स्रोतों का जलस्तर घट रहा है और झीलें तथा तालाब सूखते जा रहे हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों और पशुओं के लिए पेयजल संकट गहरा गया है. उन्होंने कहा कि पेयजल व्यवस्था के लिए पहले घोषित प्रति तालुक एक करोड़ रुपये की सब्सिडी पर्याप्त नहीं है.
राज्य सरकार को अतिरिक्त दो करोड़ रुपये जारी कर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए. साथ ही भूजल स्तर गिरने से किसान बोरवेल पर निर्भर हो गए हैं और बिजली आपूर्ति की कमी से उन्हें परेशानी हो रही है. नारियल, सुपारी और अन्य बागवानी फसलों को बचाने के लिए प्रतिदिन लगातार सात घंटे तीन-फेज बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए.
बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि सूखा और बाढ़ जैसी परिस्थितियां नई नहीं हैं. ऐसे समय में राज्य सरकार को केंद्र से सहायता मांगने से पहले अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए राहत राशि जारी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगी, लेकिन अगर राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती है तो किसानों के साथ अन्याय होगा. राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता किसानों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, जबकि कांग्रेस सरकार किसानों की परेशानी से अधिक राजनीतिक घटनाक्रम और सत्ता के समीकरणों पर ध्यान दे रही है.
नागरिक पुलिस प्रश्नपत्र लीक मामले पर मंत्री प्रियंक खड़गे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और अहंकारपूर्ण बयान देने के बजाय युवाओं की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच सत्ता को लेकर चल रहे मतभेद राज्य के प्रशासन को प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कैबिनेट विस्तार में कई जिलों और पिछड़े समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला और सरकार ने राज्य के समग्र विकास से अधिक राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता दी है.
बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य सरकार से एक बार फिर मांग की कि राज्य के सभी प्रभावित तालुकों को बिना देरी सूखाग्रस्त घोषित किया जाए और किसानों के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज जारी किया जाए. उन्होंने कहा कि किसानों की जान और आजीविका बचाना सरकार का पहला कर्तव्य है और भाजपा किसानों के हित से जुड़े हर मुद्दे पर उनके साथ खड़ी रहेगी. (एएनआई)
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