
पश्चिम बंगाल की सियासत में आए 15 साल के बाद बड़े बदलाव के साथ अब विकास और योजनाओं की नई चर्चा शुरू हो गई है. लंबे समय से केंद्र और राज्य के बीच टकराव की वजह से जिन योजनाओं का लाभ राज्य के किसानों और लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया, अब उनके लागू होने की उम्मीद तेज हो गई है.

बंगाल चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब पीएम मत्स्य संपदा योजना, आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना, पीएम फसल बीमा योजना और चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना जैसी योजनाएं हर घर तक पहुंचेंगी? चुनाव के दौरान इन योजनाओं को बड़ा मुद्दा बनाया गया था, और अब लोगों की नजर इस बात पर है कि वादे जमीनी हकीकत में कब बदलते हैं.

मछुआरों के कल्याण और उनके रजिस्ट्रेशन में कथित असहयोग के कारण इस योजना का लाभ मछुआरा समुदाय तक नहीं पहुंच पाया है. लेकिन अब बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने से पश्चिम बंगाल के मछुआरों को इस योजना का लाभ मिलेगा.

यह स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी योजना है, जिसके माध्यम से गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है. लेकिन केंद्र और ममता सरकार में तनातनी की वजह से पश्चिम बंगाल ने इस स्वास्थ्य योजना को नहीं अपनाया है, इसकी जगह राज्य सरकार 'स्वास्थ्य साथी' योजना चलाती थी.

ममता बनर्जी में बंगाल सरकार ने इस योजना से बाहर रहने का विकल्प चुना था. लेकिन अब बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद पीएम फसल बीमा योजना का लाभ पश्चिम बंगाल के किसानों को भी मिलेगा.

उत्तर बंगाल में चाय बागान श्रमिकों के लिए ममता सरकार ने केंद्र की 'चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना' को लागू नहीं किया था. बीजेपी ने चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में आते ही चाय श्रमिकों को इस योजना का लाभ मिलेगा.

पश्चिम बंगाल में पीएम आवास योजना के तहत भी कई बार फंड रोकने और अनियमितताओं के आरोपों के चलते काम प्रभावित हुआ. सत्ता बदलने से आवास के PM Awas Yojana के जरिए गरीबों को पक्के घर मिलने की रफ्तार तेज हो सकती है.
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