
हापुड़ जिले के बहादुरगढ़ में आज ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों का उत्साह देखने लायक रहा. प्रदेश के 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज का यह 73वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती-किसानी से जुड़ी नई जानकारियां हासिल कीं.

किसान कारवां के पहले चरण में प्रगतिशील किसान मूलचंद आर्य ने जैविक खेती के फायदों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी की सेहत लगातार खराब हो रही है, जबकि जैविक खेती मिट्टी को स्वस्थ बनाए रखती है. शुरुआती 3-4 वर्षों में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन बाद में उत्पादन सामान्य हो जाता है और क्वालिटी बेहतर मिलती है.

दूसरे चरण में मृदा वैज्ञानिक डॉ. अशोक सिंह ने बताया कि किसान मिट्टी की जांच को नजरअंदाज कर रहे हैं. मिट्टी में कार्बनिक तत्वों की कमी बढ़ रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि फसल के लिए 17 प्रकार के पोषक तत्व जरूरी हैं, इसलिए समय-समय पर मिट्टी परीक्षण कराना चाहिए.

तीसरे चरण में रिलायंस एग्रो साइंस के नितिन सारस्वत ने FOM उत्पाद की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इसके उपयोग से मिट्टी का कार्बनिक प्रतिशत बढ़ता है और उत्पादन में भी वृद्धि होती है. हापुड़ में रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों को यह उत्पाद मुफ्त में दिया जा रहा है. वहीं, चौथे चरण में इफको के सिद्धार्थ राजपूत ने नैनो उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इन उत्पादों से मिट्टी की सेहत सुधरती है और फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.

पांचवें चरण में डॉ. नीलम ने बताया कि जनपद में कई किसान उत्पादक संगठन (FPO) बन चुके हैं. इनके माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और मशीनरी की सुविधा मिल रही है, जिससे उनकी आय बढ़ रही है.

छठे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के आलोक चौधरी ने बताया कि उनकी संस्था द्वारा मुफ्त मिट्टी जांच अभियान चलाया जा रहा है. जांच के आधार पर किसानों को उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग की सही सलाह दी जाती है.

सातवें चरण में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ए.के. गिल ने बताया कि नया भूसा सीधे खिलाना नुकसानदायक हो सकता है. इसे पहले पानी में भिगोकर और हरे चारे के साथ मिलाकर देना चाहिए. साथ ही पशुओं को छायादार स्थान पर रखना जरूरी है. वहीं, आठवें चरण में स्टील इंडिया के निशांत गोयल ने खेती और बागवानी के लिए आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि किसानों के लिए विभिन्न उपकरण और सिंचाई यंत्र उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 10,000 से 60,000 रुपये तक है.

नवें चरण में डॉ. अरविंद यादव ने बताया कि कॉपर और बोरॉन की कमी से फलों की क्वालिटी प्रभावित होती है और फल झड़ने लगते हैं. उन्होंने किसानों को समय-समय पर इन तत्वों की पूर्ति करने की सलाह दी. वहीं, दसवें चरण में उद्यान निरीक्षक दलवीर सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा तोरी, करेला सहित कई सब्जियों के बीज और ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी उपलब्ध कराई जा रही है. स्प्रे मशीनों पर 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है.

ग्यारहवें चरण में किसान वकार अहमद ने बताया कि बंदर और नीलगाय की समस्या के कारण उन्होंने नींबू और गेंदे की खेती शुरू की, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है. वर्तमान में एक नींबू की कीमत करीब 10 रुपये मिल रही है.

उप कृषि निदेशक योगेंद्र कुमार ने बताया कि किसान सम्मान निधि का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्रेशन जरूरी है. बिना रजिस्ट्रेशन के अगली किस्त नहीं मिलेगी. बीज मिनी किट योजना के तहत किसानों का चयन लॉटरी से किया जाएगा.

तेरहवें चरण में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, जिसमें वकार अहमद, प्रमोद कुमार, मूलचंद आर्य, राजेंद्र कुमार, भारत भूषण के नाम रहे. वहीं, चौदहवें चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए. 2000 रुपये का पुरस्कार अनु को मिला, जबकि पहला पुरस्कार वीरेंद्र ने जीता.
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