
बागपत जनपद के खेकड़ा में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जो प्रदेश के 75 जिलों की विशेष कवरेज में 71वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साह के साथ भाग लिया. इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी, वहीं पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को अपनी योजनाओं और उनसे होने वाले लाभ के बारे में अवगत कराया.

पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र बागपत के वैज्ञानिक डॉ. विवेक राज ने बताया कि खरीफ सीजन नजदीक है और जिले में बासमती धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि धान की नर्सरी लगाने से पहले बीज उपचार अवश्य करें. उपचारित बीज को पानी से ढक कर रखें, ताकि गर्मी का असर कम हो और अंकुरण बेहतर हो. सही बीज चयन और वैज्ञानिक विधि से नर्सरी तैयार करने पर उत्पादन में वृद्धि होगी.

दूसरे चरण में कृषि विभाग की निदेशक डॉ. विभाती चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदेश सरकार फार्मर रजिस्ट्री अभियान चला रही है. भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने रजिस्ट्री कराई होगी. तीसरे चरण में वहीं, सुकून फाउंडेशन के CEO आमोद जैन ने बताया कि उन्होंने गन्ना किसानों के लिए नई तकनीकों का विकास किया है, जिससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है. उनका फाउंडेशन किसानों के साथ लगातार काम कर रहा है.

चौथे चरण में उद्यान वैज्ञानिक डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि आज के समय में बागवानी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प है. मई महीने में गड्ढे खोदकर उनमें गोबर की खाद और फंगीसाइड डाल दें. बारिश शुरू होने पर पौधारोपण करें, जिससे पौधों की बेहतर वृद्धि होगी.

पांचवें पादप प्रजनन वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार ने बताया कि बागपत में गन्ने की खेती बड़े स्तर पर होती है. उन्होंने बड चिप नर्सरी तकनीक अपनाने की सलाह दी. साथ ही चेतावनी दी कि 0238 वैरायटी रेड रॉट बीमारी से प्रभावित है, और उस पर रोक लग चुकी है, इसलिए किसान उन्नत और सुरक्षित किस्मों का ही चयन करें.

छठवें गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अनीता यादव ने कहा कि संतुलित आहार में दालों के साथ रंग-बिरंगी सब्जियों का होना जरूरी है. किसानों को अपने घर के लिए विविध सब्जियों की खेती करनी चाहिए. सातवें चरण में पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. शिवम सिंह ने धान और खरीफ फसलों में कीट और रोग प्रबंधन के बारे में जानकारी दी. उन्होंने सलाह दी कि किसान बिना विशेषज्ञ सलाह के दवाओं का प्रयोग न करें और कृषि विज्ञान केंद्र या विभाग से मार्गदर्शन लें.

आठवें चरण में पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि पशुओं को संतुलित आहार देना जरूरी है. 3 लीटर दूध देने वाली गाय को 1 किलो पोषणयुक्त आहार और भैंस को 2.5 लीटर दूध पर 1 किलो आहार देना चाहिए. साथ ही हरा चारा और मिनरल मिक्स भी जरूरी है.

नौवें चरण में इफको एमसी के मंडल प्रभारी विनीत कुमार ने बताया कि उनके उत्पाद गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं और एमआरपी पर ही उपलब्ध होते हैं. 15,000 तक की खरीद पर किसानों को 1 लाख रुपये तक का बीमा भी दिया जाता है. वहीं, दसवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र बागपत के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत ने कहा कि किसान कारवां किसानों को नई तकनीक और जानकारी देने का प्रभावी माध्यम है.

कार्यक्रम के ग्यारहवें चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया, जिसमें 10 किसानों को 500 रुपये के पुरस्कार दिए गए. पहला पुरस्कार हिना खान और दूसरा राम लखन ने जीता.
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