
नीदरलैंड दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ विश्व प्रसिद्ध अफ्सलाउटडाइक (Afsluitdijk) डैम का दौरा किया. इस दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच वाटर मैनेजमेंट, फ्लड कंट्रोल, क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया.

प्रधानमंत्री मोदी ने अफ्सलाउटडाइक डैम के दौरे के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वाटर मैनेजमेंट के क्षेत्र में नीदरलैंड ने दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की है. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को नीदरलैंड के अनुभव और तकनीक से सीखने की जरूरत है.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत वाटर मैनेजमेंट के इस आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि खेती में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जा सके, बाढ़ से सुरक्षा सुनिश्चित हो और इनलैंड वाटर नेटवर्क का विस्तार किया जा सके.

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अफ्सलाउटडाइक डैम सिर्फ एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि इनोवेशन और विजन का प्रतीक है. यह बांध समुद्री जल को नियंत्रित करने, बाढ़ से बचाव करने और मीठे पानी के भंडारण में अहम भूमिका निभाता है.

मंत्रालय ने कहा कि इस दौरे के दौरान गुजरात के महत्वाकांक्षी कल्पसर प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई. इस परियोजना का उद्देश्य खंभात की खाड़ी के पास एक विशाल मीठे पानी का जलाशय और बांध बनाना है, जिससे सिंचाई और पीने वाली पानी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

भारत और नीदरलैंड के बीच पहले से ही जल प्रबंधन और समुद्री तकनीक के क्षेत्र में सहयोग रहा है, लेकिन पीएम मोदी की इस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने का काम किया है. अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देश भविष्य में जल तकनीक, और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को भारत के दीर्घकालिक जल सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड की यह यात्रा उनकी चार देशों की यूरोप यात्रा का हिस्सा है, जिसमें स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी शामिल हैं.
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