
बिहार के मुजफ्फरपुर की शाही लीची पूरी दुनिया में अपनी मिठास और स्वाद के लिए मशहूर है, लेकिन जिले की एक खास जगह ऐसी भी है जहां हर साल सबसे पहले लीची पकती है. मुजफ्फरपुर शहर स्थित बड़ी ईदगाह का लीची बागान पिछले कई वर्षों से वैज्ञानिकों और रिसर्च टीमों के लिए भी ये एक कौतूहल का विषय बना हुआ है.

अमूमन मुजफ्फरपुर में 20 मई के बाद लीची की तुड़ाई शुरू होती है, लेकिन बड़ी ईदगाह के बगीचे में मई के दूसरे सप्ताह से ही शाही लीची पककर तैयार हो जाती है. यही वजह है कि जिले में सबसे पहले यहीं से लीची की तुड़ाई शुरू होती है और इसकी पहली खेप दिल्ली की आजादपुर मंडी भेजी जा रही है. स्थानीय लीची व्यवसायी पवन सिंह का कहना है कि यह परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है.

बड़ी ईदगाह के बगीचे की देखभाल करने वाले किसान रिजवान आलम बताते हैं कि उनके पिता भी यही कहते थे कि सबसे पहले बड़ी ईदगाह की लीची ही पकती है. उन्होंने बताया कि फिलहाल बगीचे में 60 से 65 लीची के पेड़ हैं, जिनसे हर साल करीब 100 से डेढ़ सौ कार्टन लीची तैयार होती है.

यह लीची दिल्ली के बाजारों में भेजी जाती है, जहां इसकी काफी मांग रहती है. शुरुआती दौर में इसकी कीमत 200 से ढाई सौ रुपये किलो तक मिल जाती है. इस रहस्य को समझने के लिए कई रिसर्च कंपनियां और वैज्ञानिक यहां आ चुके हैं. फोटो और सैंपल लेने के बावजूद अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है.

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक वैज्ञानिक डॉ. विकास दास के मुताबिक, बगीचे की मिट्टी की ऊपरी सतह पर ब्रिक्स की परत होने से तापमान ज्यादा रहता है, जिससे लीची जल्दी पक सकती है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह कोई अलग किस्म की लीची नहीं, बल्कि सामान्य शाही लीची ही है.

मुजफ्फरपुर की शाही लीची को बिहार के GI टैग वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल किया गया है. जर्दालू आम, कतरनी चावल और मगही पान के बाद शाही लीची बिहार का चौथा GI टैग प्राप्त उत्पाद है जिले में 12 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लीची की खेती होती है और हजारों किसान इससे जुड़े हैं.

खास बात यह भी है कि बड़ी ईदगाह के बगीचे से होने वाली आमदनी ईदगाह कमेटी के पास जमा होती है, जिसे धार्मिक और सामाजिक कार्यों में खर्च किया जाता है. मुजफ्फरपुर की शाही लीची देश ही नहीं, विदेशों तक निर्यात की जाती है. अपने खास स्वाद, बेहतर गूदे और मिठास की वजह से इसे दुनिया की बेहतरीन लीचियों में गिना जाता है.
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