
राप्ती और घाघरा नदियों के बीच स्थित संत कबीर नगर जनपद में ‘किसान तक’ के किसान कारवां का 47वां पड़ाव पहुंचा. जनपद के छपरा मगर्वी गांव में किसान कारवां कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया और खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं.

पहले चरण में केवीके संत कबीर नगर के वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र प्रताप सोनकर ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के सही उपयोग के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अलग-अलग फसलों के लिए उर्वरकों की मात्रा अलग होती है और किसानों को फसल की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि उर्वरकों की सही मात्रा और उपयोग संबंधी पूरी जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा समय-समय पर किसानों को दी जाती है, इसलिए किसानों को वैज्ञानिकों से संपर्क बनाए रखना चाहिए.

दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने किसानों को फसल चक्र अपनाने की सलाह दी और बताया कि फसल चक्र में कौन-कौन सी फसलें किस समय लगानी चाहिए, इसकी भी विस्तृत जानकारी दी. आगे उन्होंने किसानों को कार्बन क्रेडिट के बारे में बताया और समझाया कि. किसान इससे कैसे कमाई कर सकते है. इसको लेकर किसानों को जागरूक किया.

तीसरे चरण में कृषि विभाग के भूमि संरक्षण अधिकारी दीपचंद चौरसिया ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री किसानों के लिए क्यों आवश्यक है. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार द्वारा चलाई जाने वाली सभी कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी बेहद जरूरी होगी. आगे उन्होंने किसानों को बताया कि चार मोड़ के तहत किसान फार्मर रजिस्ट्री करवा सकते हैं.

चौथे चरण में कृषि विभाग के अपर जिला कृषि अधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार चौधरी ने किसानों को कृषि यंत्र किराये पर लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर योजना और कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत किसानों को कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दी जा रही है, जिससे किसान कम खर्च में आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं.

पांचवें चरण में पशुपालन विभाग के विनय कुमार पाण्डेय ने किसानों को पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड (Animal Husbandry Kisan Credit Card - AHKCC) योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को पशुपालन के लिए आसान लोन उपलब्ध कराना है, ताकि किसान निजी साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर पैसा उधार लेने से बच सकें.

छठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने किसानों को फसल चक्र के अंतर्गत अलग-अलग फसलों की खेती किस समय और किस प्रकार करनी चाहिए, इस बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने किसानों से कहा कि खेती में उपयोग होने वाले बीजों को बुवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले खरीद लें और उनका अंकुरण (जमाव) परीक्षण अवश्य करें. इससे बीज की गुणवत्ता और संभावित उत्पादन का सही अनुमान लगाया जा सकता है.

सातवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. तरुण कुमार सिंह ने किसानों को एग्रो फॉरेस्ट्री (Agroforestry) के प्रति जागरूक किया. उन्होंने बताया कि एग्रो फॉरेस्ट्री कम समय में अधिक आय प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है. इसके तहत किसानों को आय बढ़ाने वाले वृक्षों की खेती अपनाने की सलाह दी गई. साथ ही उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए भी प्रेरित किया.

आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के मत्स्य एवं पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश चंद्र ने किसानों को समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस तकनीक को अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपने खेतों में विभिन्न प्रकार की फसलों, पशुपालन और मछली पालन को एक साथ अपनाएं, ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके.

नौवें चरण में जादूगर सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने के लिए भी अपील की.

दसवें चरण में प्रगतिशील किसान सुरेन्द्र राय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज किसान यदि आगे बढ़ रहे हैं, तो इसका श्रेय कृषि वैज्ञानिकों और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को जाता है. उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक किसान वही है, जिसके पास पशु हों. यदि किसान अपनी खेती में सड़ी हुई गोबर खाद का उपयोग करना चाहता है, तो उसके पास पशुधन होना आवश्यक है.

अंतिम ग्यारहवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरे विजेता प्रीति रही,जिन्हें 2000 रुपये दिए गए. इसके साथ प्रथम विजेता सुरेंद्र को 3000 रुपये की राशि दी गई. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today