
अगर आप भी होम गार्डनिंग करते हैं या करने की सोच रहे हैं तो खाद-पानी से जुड़ी छोटी-छोटी बारीकियां सीखनी होंगी. जब हम पहली बार गार्डनिंग करते हैं तो शुरुआती समय में सोचते हैं कि अधिक खाद और पानी देने से पौधों की ग्रोथ अधिक तेजी से होगी. दरअसल, ऐसा होता नहीं है.

जिस चीज की जब और जितनी आवश्यकता हो उसकी पूर्ति उतनी ही करनी चाहिए. यहां हम आपको फल-सब्जी, फूल और मसालों के पौधों में खाद देने का सही समय बताने जा रहे हैं. इतना ही नहीं कब कौन सी खाद देनी है इसपर भी जानकारी देंगे.

अगर आप किचन गार्डनिंग करते हैं तो गार्डन में ऑर्गेनिक खाद देना ही सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है. ज्यादातर सब्जियां 3-4 महीने में तैयार हो जाती हैं. 3 महीने में तैयार होने सब्जियों में अधिकतम दो बार खाद देना चाहिए. ऐसे पौधे जिनको रोज सींचने की जरूरत नहीं होती उन पौधों को कोकोपीट खाद दें.

कोकपीट खाद मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनाए रखती है. दूसरी बार पौधों को तब खाद दी जाती है जब उनमें फूल आने लगें. जब पौधों में फूल आएं तो वर्मी कंपोस्ट देना चाहिए. वर्मी कंपोस्ट खाद-बीज की दुकानों में आसानी से उपलब्ध होती है.

जो पौधे 4-6 महीने में तैयार होते हैं उन्हें 45-50 दिनों के अंतराल में तीन बार वर्मी कंपोस्ट दें. कब और कौन सी खाद देने के बारे में जानना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी ये जानना भी है कि खाद की मात्रा कितनी होनी चाहिए. अगर पौधों की ऊंचाई 6-8 इंच है तो उसमें 1-2 चम्मच से ज्यादा खाद नहीं देना चाहिए.

एक फीट से अधिक पौधे की ऊंचाई होने पर एक मुट्ठी खाद दें. खाद देने से पहले पौधों की सिंचाई जरूर करनी चाहिए. पानी डालने से खाद मिट्टी में आसानी से घुल जाती है. इससे पौधों को खाद का पूरा पोषण सही समय और सही मात्रा में मिलता है.

खाद के अलावा पौधों में पानी, हवा और प्रकाश की भी खास जरूरत होती है. पौधों को हमेशा ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां दिन भर की कम से कम 8 घंटे की धूप लगे. इससे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होगी. पानी की बात करें तो केवल नमी बनाए रखने की जरूरत होती है.
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