
इत्र की राजधानी कन्नौज में ‘किसान तक’ का किसान कारवां आया. किसानों ने फूल, आलू, मक्का और पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की. कृषि विभाग और विशेषज्ञों ने मिट्टी, फसलों और नई तकनीकों के बारे में सरल तरीके से समझाया. किसानों के चेहरे पर उत्साह और खुशी देखने को मिली.

गांव में परंपरागत फसलों के साथ आलू और फूलों की खेती से किसानों को लाभ होता है. इस कार्यक्रम में किसानों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं और उन्हें सही समाधान मिला. इफको और चंबल फर्टिलाइजर ने अपने उत्पादों की जानकारी दी, जिससे किसानों को खेती में मदद मिली.

कृषि विभाग ने बताया कि कन्नौज की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बहुत कम रह गई है. अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के कारण यह घटा है. विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि फसल के अवशेष और पत्तियों का उपयोग कर कार्बन बढ़ाया जा सकता है.

जिला पशु चिकित्सा अधिकारी ने किसानों को ‘नंद बाबा दुग्ध मिशन’ और मिनी नंदिनी योजना के बारे में बताया. इन योजनाओं से किसानों की आय बढ़ती है और दूध उत्पादन में सुधार आता है.

चंबल फर्टिलाइजर और इफको ने किसानों को नैनो यूरिया, डीएपी और अन्य बायो-प्रोडक्ट्स के फायदे बताए. इन उत्पादों से मिट्टी की ताकत बरकरार रहती है और फसल उत्पादन बढ़ता है.

जेके टायर ने किसानों को बताया कि उनके कृषि और ट्रैक्टर टायर 7 साल की गारंटी और तत्काल रिप्लेसमेंट सुविधा के साथ आते हैं. इससे किसानों को भरोसा और सुविधा मिलती है.

कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने मेड़ तकनीक से मक्का की बुवाई के फायदे बताए. साथ ही उन्होंने बताया कि दवाओं का अंधाधुंध प्रयोग फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी गई.

कार्यक्रम का अंत लकी ड्रॉ और सम्मान समारोह के साथ हुआ. 10 विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए गए. किसान योगेंद्र सिंह को प्रथम पुरस्कार मिला. कन्नौज अब इत्र के साथ-साथ फूल, आलू, मक्का और पशुपालन आधारित खेती के मॉडल के लिए भी जाना जा रहा है.
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