
गंगा-यमुना के दोआब में स्थित जिला फतेहपुर में किसान तक किसान कारवां पहुंचा. इस दौरान जिले के किसानों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया और इस अवसर पर उन्हें कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र फतेहपुर के वैज्ञानिकों और अधिकारियों द्वारा खेती से जुड़ी नई जानकारी गई.

पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर की प्रभारी अधिकारी डॉ. साधना वैश ने श्रीअन्न की खेती को लेकर किसानों को जागरूक किया. उन्होंने बताया कि श्रीअन्न से अनेक प्रकार के खाद्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं.

दूसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि कृष्ण मिश्रा ने जैविक खेती के साथ रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और सही उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक किया. उन्होंने कंपनी के उत्पादों की जानकारी भी दी. इसके अलावा बैंगन और गन्ना में लगने वाले प्रमुख रोगों और उनके नियंत्रण के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी.

तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि फतेहपुर जिले की भूमि ऊंची-नीची होने के कारण बारिश वाले पानी का संरक्षण करना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि बारिश के समय किसानों को खेतों की मेड़ों को मजबूत बनाना चाहिए, ताकि पानी खेत में ही संरक्षित रह सके.

चौथे चरण में इफको के उपमहाप्रबंधक ए.के. सिंह ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग को लेकर किसानों को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसान खादों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन उत्पादन पर अपेक्षित असर नहीं पड़ रहा है. उन्होंने आगे बताया कि अब सल्फर-कोटेड यूरिया बाजार में उपलब्ध है.

पांचवें चरण में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ दर्शिका गुप्ता ने किसानों को पशु एम्बुलेंस द्वारा मिल रही सुविधाओं को लेकर जानकारी दी. साथ ही उन्होंने पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान के बारे में जानकारी दी.

छठवें चरण में मैजिशियन सलमान द्वारा खेती, पशुपालन सहित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जानकारी दी गई. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को गोबर का सही उपयोग करने का तरीका भी अपने मैजिक के जरिए बताने का काम किया.

आखिर में चरण में लकी ड्रॉ का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरा पुरस्कार 2000 रुपये कलावती को मिला. वहीं, प्रथम पुरस्कार किसान रामसेवक को 3000 रुपये दिए गए. वहीं फतेहपुर जिले में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि किसानों को एक नई उम्मीद और उत्साह भी दिया.
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