
महाराष्ट्र के जालना जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फल बागान किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. गाढेसावरगांव के किसान भागवत डोंगरे को इस आपदा का सबसे बड़ा झटका लगा है, जहां उनकी केले, तरबूज और मौसंबी की फसल को भारी नुकसान हुआ है.

इस प्राकृतिक आपदा के कारण किसान आर्थिक संकट में फंस गया है और सरकार से तत्काल मदद की मांग कर रहा है. भागवत डोंगरे के पास कुल मिलाकर 7 से 8 एकड़ में फल बागान है, जिसमें 2 एकड़ में केले, 3 एकड़ में तरबूज और 2 एकड़ में मौसंबी की खेती की गई थी.

लेकिन अचानक आई तेज बारिश, ओलावृष्टि और आंधी ने उनकी फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. सबसे ज्यादा नुकसान केले की फसल को हुआ है. किसान ने करीब 2 एकड़ में लगभग 2800 से 3000 केले के पेड़ लगाए थे. लेकिन तेज हवाओं और बारिश के कारण करीब 400 से 500 पेड़ उखड़ गए या टूट गए.

जो पेड़ खड़े हैं, उनके पत्ते फट गए हैं, जिससे पेड़ों की पोषण प्रक्रिया प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा और पहले जहां 40 से 50 किलो का एक गुच्छा तैयार होता था, अब वह घटकर करीब 20 किलो तक रह जाने की आशंका है. किसान के अनुसार, इस नुकसान से करीब 4 से 6 टन केले की पैदावार कम हो सकती है.

केले की खेती में लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च आया था और 7 से 8 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन अब उत्पादन और दाम दोनों में गिरावट से बड़ा नुकसान हुआ है. वहीं, तरबूज की फसल भी ओलावृष्टि की मार से नहीं बच सकी. 3 एकड़ में लगाए गए तरबूज पर ओलों के कारण गहरे निशान पड़ गए हैं और उनके डंठल कमजोर हो गए हैं, जिससे फल समय से पहले ही टूटकर गिर रहे हैं.

पहले जहां तरबूज का वजन 4 से 5 किलो होता था, अब वह घटकर 2 से 2.5 किलो रह गया है. क्वालिटी खराब होने के कारण बाजार में भाव भी गिर गए हैं. किसान को जहां 15 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने की उम्मीद थी, वहीं अब केवल 5 रुपये प्रति किलो यानी करीब 5 हजार रुपये प्रति टन का भाव मिल रहा है.

तरबूज की खेती में करीब 2 लाख रुपये का खर्च हुआ था, लेकिन अब सिर्फ डेढ़ लाख रुपये की ही आमदनी होने की संभावना है, जिससे लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है. इसके अलावा, मौसंबी की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है. किसान ने 2 एकड़ में लगभग 300 मौसंबी के पेड़ लगाए थे. इस फसल पर करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया था और 3 से 4 लाख रुपये की आय की उम्मीद थी.

लेकिन ओलावृष्टि के कारण करीब 50 प्रतिशत फल पेड़ों से गिर गए, जिससे आमदनी पर बड़ा असर पड़ा है. कुल मिलाकर इस प्राकृतिक आपदा में किसान भागवत डोंगरे को करीब 4 से 5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. पहले से ही बाजार में फलों के दाम कम मिलने और निर्यात प्रभावित होने की वजह से किसान परेशान था.

ऐसे में इस आपदा ने उसकी स्थिति और भी खराब कर दी है. पीड़ित किसान ने सरकार से मांग की है कि तुरंत नुकसान का पंचनामा किया जाए और कम से कम खेती की लागत के बराबर मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें इस आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके. (गौरव विजय साली की रिपोर्ट)
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