
सहारनपुर जिसे देश-दुनिया में वुडन सिटी के नाम से जाना जाता है, यहां की लकड़ी पर कारीगरों के हाथों से उकेरी गई महीन नक्काशी सिर्फ एक कारोबार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कला और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी है, सहारनपुर की इसी काष्ठ कला को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ODOP में शामिल किए जाने के बाद अब इस पारंपरिक हुनर को नई तकनीक, आर्थिक मदद और ग्लोबल मार्केट से जोड़ने का काम किया जा रहा है.

खाताखेड़ी समेत सहारनपुर के कई इलाकों में लकड़ी के फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट का बड़ा कारोबार है, यहां सोफा, बेड, डाइनिंग टेबल, अलमारी, झूले, टेबल और लकड़ी से बने सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं, जिनकी मांग देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी है. करीब 45 साल से फर्नीचर के कारोबार से जुड़े मोहम्मद मुजम्मिल हुसैन बताते हैं कि ODOP योजना से सहारनपुर के छोटे कारीगरों से लेकर बड़े कारखानेदारों तक को फायदा मिला है.

सरकार की तरफ से मशीनरी और दूसरी सुविधाएं मिलने से काम आसान हुआ है और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली है. उन्होंने कहा कि सहारनपुर की लकड़ी की पहचान अब सिर्फ पारंपरिक हाथ के हुनर तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक मशीनों ने उत्पादन और लकड़ी की क्वालिटी दोनों को बेहतर करने का काम किया है. शाइनिंग हैंडीक्राफ्ट के मैनेजर विजय कटारिया भी पिछले करीब चार-पांच साल से ODOP की सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं.

उनका कहना है कि सरकार से मिली सब्सिडी की मदद से नई मशीनरी खरीदी गई और बड़ा प्लांट लगाया गया. उनके यहां वुड सीजनिंग और वुड केमिकल ट्रीटमेंट प्लांट चल रहे हैं. वुड सीजनिंग से लकड़ी की क्वालिटी बेहतर होती है, जबकि केमिकल ट्रीटमेंट के जरिए लकड़ी को कीड़ों से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है. विजय कटारिया के मुताबिक सरकार के प्रोत्साहन से उनकी इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने का मौका मिला और आज उनके प्रोडक्ट जर्मनी, अमेरिका और यूरोप के दूसरे देशों तक पहुंच रहे हैं.

मर्चेंट्स ऑफ इंडिया के नवाब शाह साल 2009 से एक्सपोर्ट के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि ODOP योजना आने के बाद छोटे कारोबारियों को काफी फायदा मिला है. पहले कई कारोबारी आर्थिक परेशानियों और जटिल प्रक्रियाओं की वजह से बड़ा काम शुरू नहीं कर पाते थे, लेकिन योजना के जरिए वित्तीय मदद और सब्सिडी मिलने से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला.

नवाब शाह के मुताबिक सहारनपुर की काष्ठ कला करीब 100 से 150 साल पुरानी है और एक समय इसके लुप्त होने का खतरा था, लेकिन ODOP जैसी योजनाओं ने इस कला से जुड़े आर्टिस्ट्स को एक तरह से जीवनदान दिया है. उनका कहना है कि सरकार का लोकल टू ग्लोबल का विजन अब जमीन पर दिखाई दे रहा है और सहारनपुर के लकड़ी के प्रोडक्ट अमेजन, फ्लिपकार्ट और दूसरे इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर मैन्युफैक्चरर से सीधे ग्राहक तक पहुंच रहे हैं.

सरकारी आंकड़ों की बात करें तो ODOP योजना के तहत सहारनपुर में बड़ी संख्या में लाभार्थियों को फायदा मिला है. पिछले नौ वर्षों में ODOP मार्जिन मनी योजना के तहत कुल 506 लोगों को 87 करोड़ 75 लाख रुपये का लोन वितरित किया गया है. मौजूदा वित्तीय वर्ष में विभाग को तीन करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला है, जिसमें अब तक 78 लाख रुपये का लोन मार्जिन मनी के रूप में वितरित किया जा चुका है.
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