
खेती में अक्सर माना जाता है कि अच्छी फसल के लिए गहरी जुताई, ज्यादा खाद और भरपूर सिंचाई जरूरी है. लेकिन, विज्ञान कुछ और ही कहानी कहता है. खेत की सबसे मेहनती और भरोसेमंद मशीन जमीन के अंदर चुपचाप काम करती है. यही वजह है कि अक्सर कहा जाता है- एक केंचुआ दस केंचुओं का काम करता है. फैक्ट ऑफ द डे स्टोरी में आज पढ़िए केंचुए से जुड़ी रोचक जानकारी...

केंचुआ सिर्फ मिट्टी में रहने वाला जीव नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक भाषा में उसे ‘Soil Engineer’ कहा जाता है. मिट्टी की सेहत सुधारने में उसकी भूमिका इतनी व्यापक है कि कोई एक मशीन उसका पूरा विकल्प नहीं बन सकती. शोध बताते हैं कि केंचुआ मिट्टी के अंदर चलते हुए सुरंगें बनाता है, जिससे मिट्टी में हवा और पानी का संचार बेहतर होता है. इससे जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचती है और मिट्टी सख्त होने से बचती है. यह किसानों के लिए एक तरह से नेचुरल टिलेज मशीन का काम करता है.

केंचुए की यह गतिविधि प्राकृतिक जुताई का काम करती है. वह नीचे की मिट्टी को ऊपर लाता है और ऊपर मौजूद जैविक पदार्थ को नीचे मिलाता है. इस प्रक्रिया से मिट्टी का ढांचा भुरभुरा बनता है, जिसे कृषि विज्ञान में फ्राएबल सॉइल स्ट्रक्चर (Friable Soil Structure) कहा जाता है. यही ढांचा फसल की जड़ों को फैलने में मदद करता है और पौधों को मजबूत बनाता है.

केंचुआ जो मिट्टी और जैविक अवशेष खाता है, उसे बाहर निकालते समय वह वर्मीकास्ट में बदल जाता है. वर्मीकास्ट को दुनिया की सबसे संतुलित जैविक खादों में गिना जाता है. इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश के साथ-साथ लाभकारी सूक्ष्म जीव भी होते हैं. कई अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि वर्मीकास्ट से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है.

केंचुए की बनाई सुरंगें मिट्टी की जलधारण क्षमता भी बढ़ाती हैं. बारिश या सिंचाई का पानी जमीन में गहराई तक जाता है और लंबे समय तक संग्रहित रहता है. इससे जलभराव की समस्या कम होती है और सूखे की स्थिति में फसल ज्यादा समय तक नमी पा सकती है.

यही कारण है कि कहा जाता है कि एक केंचुआ दस केंचुओं का काम करता है. वह एक साथ जुताई करता है, खाद बनाता है, मिट्टी को जिंदा रखता है और फसल की जड़ों के लिए रास्ता तैयार करता है. अगर यही काम मशीनों और रसायनों से किया जाए तो कई गुना ज्यादा लागत और मेहनत लगेगी.

दुनियाभर में किसान अब जैविक खेती और प्राकृतिक खेती का लोहा मान रहे हैं. टिकाऊ खेती का सीधा संदेश यही है कि जिस खेत में केचुए जिंदा हैं, वह खेत खुद जिंदा है. केंचुओं की रक्षा करके ही किसान अपनी मिट्टी, फसल और अपने भविष्य की रक्षा कर सकते हैं.
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