
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 जून को अयोध्या में किसानों के साथ धान की रोपाई की. इस दौरान उन्होंने खेतों में अपनाई जा रही पारंपरिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की सराहना की. उन्होंने कहा कि खेती में पुरानी प्राकृतिक तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है.

शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि अयोध्या के खेतों में धान की मुख्य रोपाई से पहले ढैंचा की फसल उगाई गई थी. इसके बाद ढैंचा को खेत की मिट्टी में मिला दिया गया, जिससे यह हरी खाद के रूप में काम करता है. इससे मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है और खेत की उर्वरता बेहतर होती है.

कृषि मंत्री ने बताया कि ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलें मिट्टी के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं. इन्हें खेत में मिलाने से मिट्टी भुरभुरी बनती है और उसमें पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है. इससे फसलों की बढ़वार अच्छी होती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता भी कम की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि परंपरा में ढैंचा और गाय के गोबर से तैयार खाद का विशेष महत्व रहा है. किसान लंबे समय से इन प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल कर मिट्टी की सेहत को बनाए रखते आए हैं, लेकिन समय के साथ इनका उपयोग कम होता गया है.

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की कि वे खेतों की उर्वरता बनाए रखने के लिए हरी खाद, जैविक खेती और संतुलित कृषि पद्धतियों को अपनाएं. उन्होंने कहा कि मिट्टी केवल फसल उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की कृषि व्यवस्था का आधार भी है. इसलिए इसकी गुणवत्ता को बनाए रखना बेहद जरूरी है.

कृषि मंत्री ने कहा कि टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना और मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित करना ‘खेतों को बचाओ’ अभियान का मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक कृषि ज्ञान को भी अपनाएं, ताकि खेती अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बन सके.

उन्होंने कहा कि हरी खाद, जैविक खाद और संतुलित खेती के जरिए किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं और कृषि भूमि को भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं. अयोध्या में धान रोपाई के दौरान सामने आई यह पारंपरिक पद्धति किसानों के लिए प्राकृतिक खेती की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है.
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