शिवराज सिंह चौहानकेंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लोगों ने अब तक कई अलग-अलग अंदाज में देखा है. कभी वो किसानों के साथ खेत में हल चलाते नजर आते हैं, तो कभी ट्रैक्टर चलाकर खेती से अपना जुड़ाव दिखाते हैं. लेकिन इस बार शिवराज सिंह चौहान का एक बिल्कुल नया रूप सामने आया है. राजनीति और खेती के बाद अब उन्होंने लेखन की दुनिया में भी कदम रख दिया है. किसानों और गांव की जिंदगी को करीब से समझने वाले शिवराज सिंह चौहान अपने लंबे सार्वजनिक जीवन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करने के अनुभवों को एक किताब में समेटा है.
शिवराज सिंह चौहान ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर जानकारी दी कि उनकी नई किताब ‘अपनापन’ का विमोचन 26 मई 2026 को सुबह 10:30 बजे नई दिल्ली के पूसा स्थित NASC कॉम्प्लेक्स में किया जाएगा. शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस पुस्तक में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करने के अपने अनुभवों, भावनाओं और प्रेरणाओं को साझा किया है.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले तीन दशकों में उन्हें PM मोदी के साथ अलग-अलग जिम्मेदारियों में काम करने का मौका मिला. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व, नेतृत्व, सेवा भावना, संगठन क्षमता, सुशासन और देश के प्रति समर्पण को करीब से देखा और समझा. इन्हीं अनुभवों, भावनाओं और जीवन से मिली प्रेरणाओं को उन्होंने अपनी नई किताब ‘अपनापन’ में जगह दी है. उन्होंने कहा कि यह किताब सिर्फ अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, देशभक्ति और जनकल्याण जैसे मूल्यों से जुड़ी एक प्रेरणादायक यात्रा है. शिवराज सिंह चौहान को उम्मीद है कि यह पुस्तक खासकर युवाओं को विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगी.
शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पुस्तक 'अपनापन' में लिखा है कि कभी-कभी जीवन में आप ऐसे व्यक्ति के साथ काम करते हैं, जिसे दुनिया एक नेता के रूप में देखती है, लेकिन आप उसमें एक साधक, एक कर्मयोगी, एक असाधारण इंसान को देखते हैं. मेरे लिए 'अपनापन' केवल एक पुस्तक नहीं है, यह उन तैंतीस वर्षों को शब्दों में उतारने का प्रयास है, जिनको मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहुत करीब से जिया है. लोगों ने मंचों से उन्हें भाषण करते हुए देखा है, लेकिन मैंने उनमें उस व्यक्ति को देखा है, जो दिन भर देर रात तक काम करने के बाद भी अगली सुबह उसी ऊर्जा के साथ देश के लिए खड़ा होता है. लोग उनके निर्णय को देखते हैं, लेकिन मैंने देखा है कि कैसे उनका दिल हर गरीब, हर किसान, मां, बहन-बेटी और हर कार्यकर्ता के लिए धड़कता है.
मुझे आज भी 1991 की एकता यात्रा याद है. तब कई लोग उसे राजनीतिक यात्रा के रूप में देखते थे, लेकिन PM मोदी ने उसे राष्ट्रीय चेतना का अभियान बना दिया. उनकी सोच स्पष्ट थी-तिरंगा श्रीनगर के लाल चौक तक ही नहीं, देश के हर युवा के दिल तक पहुंचना चाहिए, और तब मैंने पहली बार महसूस किया कि नेतृत्व सिर्फ भाषण से नहीं आता, नेतृत्व तपस्या से आता है, नेतृत्व अनुशासन से आता है, नेतृत्व समर्पण से आता है और सबसे ज्यादा नेतृत्व अपनेपन से आता है.
इसलिए मुझे लगा कि उन अनुभवों को यादों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि एक पुस्तक के रूप में जनता तक पहुंचाना चाहिए और इसी सोच ने मुझे लेखक बना दिया. 'अपनापन' यह पुस्तक आपके सामने है. इस पुस्तक में संगठन और सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोग यह देखेंगे कि बड़े लक्ष्य केवल भाषण से पूरे नहीं होते. बड़े लक्ष्य अनुशासन, समर्पण, तपस्या और सामूहिक प्रयासों से पूरे किए जा सकते हैं.
इस पुस्तक में युवा देखेंगे कि कैसे जनता से जुड़कर, उनकी समस्या जानकर और उनको साथ लेकर मेहनत करके बदलाव लाया जा सकता है. वे लोग, जो भारत में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव को देख रहे हैं, इस पुस्तक में एक ऐसी झलक देखेंगे कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े राष्ट्रीय परिवर्तन का वातावरण बनाया जा सकता है, और दुनिया में वे लोग, जो PM मोदी के नेतृत्व को देख रहे हैं, उनको इस पुस्तक में उनके व्यक्तित्व को ज्यादा निकटता से समझने का अवसर मिलेगा.
इस किताब 'अपनापन' में आपको सिर्फ घटनाएं नहीं, वह सोच मिलेगी जिसने देश को बदलने का साहस किया. वह अनुशासन मिलेगा, जिसने सपनों को सिद्धि में बदल दिया और वह अनुभव मिलेंगे, जो नेतृत्व को देखने के आपके नजरिए को बदल देंगे. इस पुस्तक को पढ़ते समय अगर आपने यह महसूस किया कि देश बदलने के लिए बड़े पद नहीं, बड़े संकल्प की जरूरत होती है, तो मैं मानूंगा कि मेरा प्रयास सार्थक हुआ.
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