कर्जमाफी और धान की MSP को लेकर हल्लाबोल, किसान 30 जून को करेंगे राज्यव्यापी भूख हड़ताल

कर्जमाफी और धान की MSP को लेकर हल्लाबोल, किसान 30 जून को करेंगे राज्यव्यापी भूख हड़ताल

तमिलनाडु में किसानों ने फसल कर्जमाफी और धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. तमिलनाडु ऑल फार्मर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर 30 जून को राज्यव्यापी भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है.

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कर्जमाफी और धान की MSP को लेकर हल्लाबोल, किसान 30 जून को करेंगे राज्यव्यापी भूख हड़तालसरकार के खिलाफ किसानों का मोर्चा (AI- तस्वीर)

तमिलनाडु ऑल फार्मर्स एसोसिएशन ने फसल कर्जमाफी को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. एसोसिएशन का आरोप है कि अधिकारी मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर सही जानकारी नहीं दे रहे हैं. इसको लेकर संगठन ने 30 जून को राज्यव्यापी भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है. किसान संगठन की मुख्य मांग ये है कि किसानों का पूरा फसल लोन जमीन के रकबे (क्षेत्रफल) के आधार पर माफ किया जाए. इसके अलावा उन्होंने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग भी रखी है.

यह फैसला चेन्नई जोन के पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया. बैठक में चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, तिरुवल्लूर, रानीपेट और तिरुवन्नामलाई जिलों के किसान प्रतिनिधि शामिल हुए. संगठन का कहना है कि किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए और उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेना चाहिए.

लोन माफी के नियमों से नाराज किसान 

एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि CM विजय के नेतृत्व वाली मौजूदा TVK सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में छोटे और सीमांत किसानों का 100 फीसदी लोन और बड़े किसानों का 50 प्रतिशत लोन माफ करने का वादा किया था. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बाद में जो नियम लागू किए, उनमें जमीन के आकार के बजाय पैसे की सीमा (मॉनेटरी कैप) को आधार बनाया गया, जिससे किसान समुदाय में भारी असंतोष है.

किसान नेता पी.आर. पांडियन ने बताया कि शुरुआती घोषणा में कर्जमाफी की सीमा 50,000 रुपये तय की गई थी. विरोध के बाद इसे बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया, जबकि बड़े किसानों के लिए केवल 35,000 रुपये की मामूली माफी दी गई है. एसोसिएशन का तर्क है कि पैसे के आधार पर की गई यह गणना केंद्र सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक और नाबार्ड (NABARD) की स्थापित नीतियों का सीधा उल्लंघन है.

अधिकारियों पर गुमराह करने का आरोप

मौजूदा राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार, कर्जमाफी जमीन के रकबे के आधार पर तय होनी चाहिए, जिसमें सीमांत किसानों के लिए 2.5 एकड़ तक और छोटे किसानों के लिए 5 एकड़ तक का पैमाना होना चाहिए. किसानों का आरोप है कि अधिकारी जानबूझकर सरकार को इन राष्ट्रीय नियमों के अनुसार पूरी लोन माफी लागू करने से रोक रहे हैं.

धान खरीद संकट को लेकर किसानों में नाराजगी

वहीं, धान की खरीद में आ रही भारी रुकावट पर चिंता जताते हुए किसानों ने आरोप लगाया कि पिछले नौ महीनों में यानी पिछले कुरुवई और सांबा सीजन के दौरान खरीदी गई धान बिना पिसाई के खुले यार्ड और खरीद केंद्रों में पड़ी हुई है. खबरों के अनुसार, मिल मालिकों ने पुराने और रंग बदले हुए अनाज को प्रोसेस करने से इनकार कर दिया है और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स की भी लगातार कमी बनी हुई है. ऐसे में एसोसिएशन ने मॉनसून के आने से पहले एक बड़े संकट की चेतावनी दी है.

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे डेल्टा क्षेत्र में कुरुवई की आगामी फसल कटाई से पहले इस गतिरोध को दूर करने के लिए खाद्य मंत्री और नागरिक आपूर्ति अधिकारियों के साथ तुरंत एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाएं. किसानों ने पिछली DMK सरकार द्वारा लाए गए 'तमिलनाडु भूमि समेकन (विशेष परियोजनाओं के लिए) अधिनियम, 2023' को तुरंत रद्द करने की मांग की है. उनका आरोप है कि इसी कानून की वजह से बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट घरानों द्वारा जमीन का अधिग्रहण हुआ है.

30 जून को राज्यव्यापी भूख हड़ताल की चेतावनी

इसके अलावा उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार केंद्र से बात करके खाद की तेजी से बढ़ती कीमतों पर रोक लगाए. साथ ही प्राइवेट डिस्ट्रीब्यूटरों द्वारा यूरिया और DAP की बिक्री के साथ दूसरे उत्पादों को अनिवार्य रूप से देने की प्रथा को बंद करवाए. किसान नेता पांडियन ने बताया कि 30 जून को होने वाली भूख हड़ताल में सभी 38 जिलों के किसान हिस्सा लेंगे. (PTI)

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