किसानों का हल्लाबोलगुजरात में खेती की जमीनों से गुजरने वाली हाई-वोल्टेज बिजली लाइनों, भूमि अधिग्रहण के बदले कम मुआवजे और किसानों के अन्य मुद्दों को लेकर राज्य भर के किसान आज गांधीनगर की ओर कूच किए. किसान संगठनों के नेतृत्व में आयोजित इस ट्रैक्टर रैली में हजारों किसान शामिल हुए. किसानों ने सरकार से उनकी समस्याओं का समाधान करने और उचित मुआवजा देने की मांग की. इस रैली का आयोजन किसान हित रक्षक समिति और कांग्रेस के सहयोग से किया गया. जिसके चलते अहमदाबाद और गांधीनगर में प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है.
राज्य के अलग-अलग जिलों से किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ अहमदाबाद के शांतिपुरा सर्कल पर एकत्रित हुए. इसके बाद बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ रैली गांधीनगर के लिए रवाना हुई. किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी जमीन और आजीविका की कीमत पर कोई फैसला नहीं होना चाहिए. किसानों ने आरोप लगाया कि बिजली ट्रांसमिशन कंपनियां खेती की जमीनों से लाइनें और खंभे लगाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बदले किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. उनका कहना है कि बिजली परियोजनाओं के कारण खेती प्रभावित होती है और जमीन की उपयोगिता भी कम हो जाती है.
रैली में शामिल किसानों ने कहा कि कई जगहों पर उनकी अनुमति के बिना कंपनियां खेतों में प्रवेश कर जाती हैं. किसानों का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस का इस्तेमाल कर उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की जाती है. किसानों का कहना है कि वे राज्य के विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य और नुकसान का सही मुआवजा मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह रैली सरकार को अपनी समस्याओं पर ध्यान देने के लिए एक संदेश है.
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि यह कोई राजनीतिक रैली नहीं है, बल्कि किसानों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का एक शांतिपूर्ण प्रयास है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों की मांगों के साथ खड़ी है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए. वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी ने कहा कि किसानों की जमीनों पर बिजली के खंभे लगाए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि निजी बिजली कंपनियों की कार्रवाई से किसान परेशान हैं.
किसानों का मुख्य विरोध खेतों से गुजरने वाली हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और मुआवजे को लेकर है. इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, फसल के सही दाम, कृषि लोन माफी और खेती से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर भी किसानों में नाराजगी है. किसान संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा. अब किसानों की इस ट्रैक्टर रैली के बाद सबकी नजर सरकार के रुख पर है. किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द समाधान निकालेगी. (बृजेश दोषी की रिपोर्ट)
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