छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड तोड़ धान की खरीद. (सांकेतिक फोटो)ओडिशा में सरकारी दर पर धान खरीद को लेकर किसानों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं. एक तरफ जिन किसानों को धान बेचने के लिए टोकन नंबर मिला है वो अपना धान बेच रहे हैं तो उन्हें धान खरीद में देरी और कटनी छंटनी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं जिन किसानों को टोकन नहीं मिला है और जो इस खरीद प्रक्रिया से बाहर हैं, उन्हें भी दलालों और बिचौलियों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है. दोनों ही स्थिति में किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. कहीं पर किसानों को वजन के नाम पर लूटा जा रहा है तो कहीं पर किसानों को एमएसपी से कम कीमत पर धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. ताजा मामला ओडिशा के गंजम जिले का है जहां पर छोटे और सीमांत किसान सस्ते दामों में धान बेचने के लिए मजबूर हैं.
यहां पर किसानों का आरोप है कि किसानों को अपने धान सस्ती कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार रुशिकुल्या रैयत महासभा के सचिव सीमांचल नाहक ने बताया कि जिले के लगभग 60 हजार किसान इस परेशानी से जूझ रहे हैं. इनमें खास कर वैसे किसान हैं जो बटाईदार हैं. वो सभी किसान आंध्र प्रदेश के व्यापारियों को अपना धान बेच रहे हैं. इनमें से अधिकांश किसान ऐसे हैं जिनके पास मंडियों में अपना धान बेचने का हक नहीं है क्योंकि उनके पास भूमि रिकॉर्ड नहीं है और भूमि मालिकों द्वारा उन्हें प्रमाणित नहीं किया गया है.
ये भी पढ़ेंः नीलगाय को भगाना है तो खेत में इस तरह जलाएं दीया, कीट- पतंगों से भी मिलेगा छुटकारा
सीमांचल नाहक ने आरोप लगाया कि बार-बार अपील के बावजूद जिला प्रशासन ने बटाईदारों को अपना धान मंडियों में बेचने की सुविधा देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. इसके कारण मजबूर होकेर वो आंध्र प्रदेश के बिचौलियों को सस्ते दामों में धान बेच रहे हैं. इसके अलावा इस वर्ष फसल जल्दी होने के कारण जिले के कई किसानों ने धान का स्टॉक कर लिया है. उन्होंने कहा, चूंकि टोकन सीमा भंडारित धान की तुलना में बहुत कम है, इसलिए किसानों के पास अपनी अधिशेष उपज आंध्र प्रदेश के किसानों को बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
उन्होंने बताया कि अधिंकाश धान खरीद केंद्र ऐसे हैं जहां पर किसानों को केंद्र तक पहुंचाने का किराया और बोरियों में हुई लागत का भुगतान नहीं किया जाता है. इतना ही नहीं उन्हें प्रति क्विंटल धान पर 5-7 किलोग्राम अतिरिक्त देने के लिए भी मजबूर किया जाता है. इस तरह से किसानों को नुकसान होता है. इन नुकसानों को सहने के बजाय, कई किसान अपनी उपज आंध्र के व्यापारियों को भी बेच रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में 2183 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी तय की गई है पर इसके मुकाबले किसानों को 75 किलोग्राम के 1470 रुपए की कीमत मिल रही है.
ये भी पढ़ेंः Budget 2024: क्या किसान होंगे मालामाल? इस बजट में किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएं होने की उम्मीद
वहीं गंजम जिले के नागरिक आपूर्ति अधिकारी पुष्पा मुंडा ने कहा कि अभी तक जिला प्रशासन को किसानों द्वारा संकटपूर्ण धान की बिक्री को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष जिले में एमएसपी पर धान बेचने के लिए 1,46,541 किसानों ने अपना धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है. जिले के धान खरीद केंद्रों में अब तक लगभग 70,000 किसानों ने 30.81 लाख धान क्विंटल बेचा है. इस वर्ष किसानों से 45.67 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है. पुष्पा मुंडा ने कहा कि फरवरी महीने तक धान खरीद की प्रक्रिया समाप्त हो सकती है. इस बीच, गंजाम कलेक्टर दिब्या ज्योति परिदा ने खरीद केंद्रों पर किसानों से कटनी छंटनी के नाम पर अतिरिक्त धान लेने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today