राष्ट्रीय अमरूद महोत्सवराजस्थान के सवाई माधोपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय अमरूद महोत्सव का भव्य आगाज किया गया. दो दिवसीय राष्ट्रीय अमरूद महोत्सव का लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधिवत उद्घाटन किया. इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा भी मौजूद रहे. सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय के दशहरा मैदान में आयोजित देश के पहले राष्ट्रीय अमरूद महोत्सव में किसानों को ओम बिरला ने संबोधित करते हुए त्रिनेत्र गणेश और चौथ माता को नमन किया और उन्होंने सवाई माधोपुर जिले को आध्यात्मिक धरती बताया. इसके अलावा उन्होंने अमरूद के अलग-अलग उत्पादों का स्वाद भी चखा.
जिले वासियों को उन्होंने सवाई माधोपुर शहर के 263 वे स्थापना दिवस की बधाई भी दी. उन्होंने कहा कि जल्द ही सवाई माधोपुर में 150 करोड़ रुपये की लागत से अमरूद प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी, जिससे सवाई माधोपुर जिले में अमरूद पैदा करने वाले किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा और अमरूद की पैदावार करने वाले किसान समृद्ध होंगे. उन्होंने कहा कि अमरूद बेहतर स्वास्थ्यवर्धक फल है.
ओम बिरला ने कहा कि जब तक किसानों की आए नहीं बढ़ेगी तब तक भारत विकसित देश की गिनती में नहीं आ सकेगा. उन्होंने कहा कि एग्रो टेक्नोलॉजी के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है. आने वाले समय में भारत की राजधानी दिल्ली में भी ऐसा ही अमरूद महोत्सव आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने भी अमरूद महोत्सव को संबंधित किया.
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राजस्थान ने देश का पहला अमरूद महोत्सव-2026 आयोजित कर स्वयं को राष्ट्रीय कृषि मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई हैं. कृषि विभाग द्वारा आयोजित अमरूद महोत्सव सवाई माधोपुर केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, नवाचार, आत्मनिर्भरता और भविष्य की कृषि अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाला ऐतिहासिक पल है. इस मौके पर कृषि मंत्री ने बताया कि महोत्सव में 250 से अधिक स्टॉल लगाकर किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती, आधुनिक यंत्र और उच्च क्वालिटी वाले बीजों की जानकारी दी गई, जिससे किसान उत्पादन बढ़ाकर आय में वृद्धि कर सकेंगे.
वैसे तो सवाई माधोपुर को देश की अमरूद राजधानी कहा जाता है. लेकिन अब अमरूद प्रोसेसिंग यूनिट से इसकी किस्मत बदल जाएगी. कृषि मंत्री ने घोषणा की कि सवाई माधोपुर में 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत की अमरूद प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जिसमें जेली, कैंडी, चिप्स, अचार, पापड़ जैसे उत्पादों का निर्माण होगा. इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, सॉर्टिंग, ग्रेडिंग और इनक्यूबेशन सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे किसानों को उपज बाहर नहीं ले जानी पड़ेगी. (सुनील जोशी और विशाल शर्मा की रिपोर्ट)
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