किसानों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा फैसलापंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों के किसानों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि केंद्र सरकार ने सुरक्षा बाड़ (Security Fence) को अंतर्राष्ट्रीय सीमा के करीब लाने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति दे दी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद CM मान ने कहा कि इस कदम से हजारों एकड़ खेती की जमीन को पर बिना किसी रुकावट के खेती का रास्ता साफ हो जाएगा, जो फिलहाल बाड़ के दूसरी तरफ फंसी हुई है.
पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को लंबे समय से अपने खेतों तक पहुंचने के लिए पहचान पत्र दिखाकर और BSF की सुरक्षा में बाड़ पार करनी पड़ती थी, जिससे उन्हें 532 किलोमीटर लंबी भारत-पाकिस्तान सीमा पर रोज़ाना मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, जहां बाड़ पंजाब के इलाके के काफी अंदर है. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने बैठक के दौरान उन्हें बताया कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और बाड़ को सीमा की ओर शिफ्ट किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना पंजाब की ज़मीन वापस से खेती के लिए आसान हो जाएगी.
सीमा मुद्दे के अलावा, CM मान ने कई लंबे समय से लंबित मुद्दों को भी उठाया, जिनमें प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 पर पंजाब की आपत्तियां, अनसुलझा सतलुज यमुना लिंक (SYL) विवाद, FCI द्वारा खाद्यान्नों की धीमी आवाजाही, आढ़तिया कमीशन को फ्रीज करना, ग्रामीण विकास निधि (RDF) और मंडी निधि का भुगतान न होना, और चंडीगढ़ के प्रशासन में पंजाब की भूमिका को कम करना शामिल है. उन्होंने इन मामलों के शीघ्र समाधान की मांग की. बता दें कि CM मान शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात किए थे.
प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 पर आपत्ति जताते हुए मान ने कहा कि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और देश के सबसे बड़े अनाज उत्पादक राज्यों में से एक है, फिर भी मसौदा बीज विधेयक संबंधित धारा के तहत अनुसूची के अनुसार राज्य का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं करता है. उन्होंने कहा कि विधेयक में पेश की गई ज़ोन-आधारित सिस्टम मौजूदा सिस्टम के विपरीत, केंद्रीय बीज समिति में पंजाब के प्रतिनिधित्व की गारंटी नहीं देती है, जिससे बीज क्षेत्र को सीधे प्रभावित करने वाले फैसलों में राज्य की आवाज़ सीमित हो जाती है.
पंजाब के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रस्तावित विधेयक राज्य बीज समिति की मौजूदा शक्तियों को भी कम करता है, क्योंकि बीज रजिस्ट्रेशन में राज्य-स्तरीय समिति के लिए कोई भूमिका नहीं रखी गई है, और मसौदा उन किसानों के लिए एक मजबूत मुआवजा ढांचे पर चुप है, जिन्हें पंजीकृत बीज के दावे के अनुसार प्रदर्शन न करने पर नुकसान होता है.
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि विदेशी देशों में परीक्षण की गई और जारी की गई बीज किस्मों को राज्य-विशिष्ट कृषि जलवायु परिस्थितियों के तहत अनिवार्य बहु-स्थान परीक्षण के बिना पंजाब और अन्य राज्यों में आयात और बिक्री की अनुमति दी गई है, जिससे किसानों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो रहा है.
उन्होंने गृह मंत्री को बताया कि कृषि पंजाब की जीवन रेखा है, जहां किसान फसलें उगाते हैं, उपज का कुछ हिस्सा बेचते हैं और अगले मौसम के लिए बीज बचाकर रखते हैं. किसानों को बीजों के लिए पूरी तरह से कंपनियों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर करना न तो व्यावहारिक है और न ही किसानों के हित में है. उन्होंने कहा कि विधेयक को अपने मौजूदा स्वरूप में संसद में नहीं लाया जाना चाहिए, और केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि चिंताओं की जांच की जाएगी.
नदी जल पर पंजाब के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है. सतलुज, रावी और व्यास नदियों के पानी की उपलब्धता में काफी कमी आई है, और इसलिए सतलुज यमुना लिंक नहर का निर्माण संभव नहीं है.
अनाज की आवाजाही और स्टोरेज की समस्या पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पांच महीनों से, FCI पंजाब से सिर्फ 4 से 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 से 6 लाख मीट्रिक टन चावल भेज रहा है. खरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 के 95 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी होने बाकी है, जबकि अभी सिर्फ 20 लाख मीट्रिक टन स्टोरेज की जगह उपलब्ध है, इसके अलावा आढ़तिया कमीशन के मुद्दे पर, सीएम मान ने कहा कि आढ़तिया कमीशन को 2019-20 खरीद सीजन से ही रोक दिया गया है, जो पंजाब एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड मार्केटिंग एक्ट 1961 के प्रावधानों के खिलाफ है. (PTI)
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