चुगली की तो लगेगा जुर्मानाछत्तीसगढ़ में चुगली… एक ऐसा शब्द जो अक्सर बड़े विवादों की जड़ बन जाता है. लेकिन बालोद जिले के मेड़की गांव ने इस समस्या का अनोखा समाधान ढूंढ लिया है. गांव की सर्वसम्मति बैठक में फैसला लिया गया कि यदि किसी व्यक्ति की चुगली से गांव में विवाद या झगड़ा होता है, तो उस पर 5 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा. इसके आलाव इस गांव में कई चीजों के लिए दंड का नियम बनाया गया है, जिसमें फसल सुरक्षा को लेकर भी सख्त प्रावधान हैं. आइए जानते हैं इस गांव के अनोखे नियम के बारे में.
मेड़की गांव में चुगली के अलावा कुछ महीने पहले फसल सुरक्षा को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं. यदि कोई किसान अपने मवेशी को खुला छोड़ देता है और वह किसी की फसल खाते हुए पाया जाता है, तो प्रति मवेशी 500 रुपये का दंड रखा गया है. इस नियम के बाद अब मवेशियों को खुला छोड़ने की प्रवृत्ति पर काफी हद तक रोक लग गई है. ग्रामीणों का कहना है कि इस नियम से फसलों के नुकसान में कमी आई है.
वहीं, चुगली वाले मुद्दे को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि कई बार चुगली करने वाला तो बच जाता है, लेकिन दो पक्षों के बीच तनाव और लड़ाई की स्थिति बन जाती है. इसी को रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है. ग्रामीणों के मुताबिक कुछ दिन पहले ही दो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी थी, जिसकी जड़ चुगली को माना गया. इसके बाद पूरे गांव ने एकमत होकर यह निर्णय लिया. फैसले के बाद से गांव में शांति और आपसी विश्वास का माहौल देखने को मिल रहा है.
इतना ही नहीं, गांव ने पहले भी सामाजिक सुधार की दिशा में कई कदम उठाए हैं. ग्रामीण धनराज साहू के अनुसार, करीब 4 साल पहले गांव में नशे के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए सामूहिक बैठक की गई थी, जिसमें सार्वजनिक स्थान पर शराब सेवन कर गाली-गलौज करते पाए जाने पर 5 हजार रुपये का जुर्माना और गांव में शराब बेचते पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड से दंडित कर शराब बेचने की सूचना देने वाले को 1 हजार रुपये पुरस्कार देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था.
ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की भलाई के लिए लिया गया है. ग्रामीणों का मानना है कि पहले आपसी संवाद और भरोसा मजबूत था, लेकिन अब अफवाहों और सोशल मीडिया के प्रभाव से गलतफहमियां तेजी से फैलती हैं. नए नियम से उम्मीद की जा रही है कि गांव में फिर से शांति और सद्भाव का वातावरण स्थापित होगा. बालोद जिले के इस अनोखे फैसले ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा है. अब देखना होगा कि चुगली पर लगा यह बैन गांव में कितनी स्थायी शांति ला पाता है और क्या यह मॉडल अन्य गांवों के लिए भी मिसाल बनता है. (किशोर साहू की रिपोर्ट)
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