खट्टर की किसान नेताओं संग मैराथन बैठकसंयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुग्राम के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की. कल रात करीब तीन घंटे चली इस बैठक में किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने MSP की कानूनी गारंटी, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समझौते से कृषि क्षेत्र को बाहर रखने और खेतों से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनों के उचित मुआवजे समेत कई मांगें रखीं. इसके अलावा किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र भी सौंपा है. इसमें कृषि और किसानों से जुड़ी कुल 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं.
1. भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि को बाहर रखने की मांग: किसान नेताओं ने मांग की कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील में कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मछली पालन को शामिल नहीं किया जाए. उनका कहना है कि व्यापार समझौते का असर सीधे किसानों की आय और घरेलू बाजार पर पड़ सकता है.
2. सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी: किसानों की सबसे प्रमुख मांग सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए MSP गारंटी कानून बनाने की है. किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना सुनिश्चित हो. उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार C2 लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर MSP तय करने की मांग भी दोहराई है.
3. किसानों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग: संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ करने की मांग रखी है. किसान नेताओं का कहना है कि फसलों का उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया है.
4. जमीन अधिग्रहण कानून में बदलाव की मांग: किसान नेताओं ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को दोबारा लागू करने की मांग की है. इसके तहत जमीन अधिग्रहण से पहले 75 प्रतिशत किसानों की लिखित सहमति, बाजार भाव से चार गुना मुआवजा और प्राथमिकता के आधार पर बंजर जमीन के अधिग्रहण जैसे प्रावधान लागू करने की मांग की गई है.
5. हाईटेंशन लाइन के लिए उचित मुआवजा: खेतों से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे को लेकर भी किसान नेताओं ने राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की. उनका कहना है कि प्रभावित किसानों को बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए. उन्होंने ग्रामीण इलाकों में बिजली लाइनों के Right of Way के लिए भी बाजार मूल्य का 60 प्रतिशत मुआवजा देने की मांग की है.
6. गन्ने का FRP 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग: किसान नेताओं ने गन्ने का FRP कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है. साथ ही उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार किसानों को गन्ने का भुगतान 14 दिनों के भीतर कराने की मांग की है. भुगतान में देरी होने पर 12 से 15 प्रतिशत ब्याज देने की मांग भी की गई है.
7. फसल नुकसान के लिए राष्ट्रीय नीति की मांग: जलवायु परिवर्तन और बाढ़-सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए किसान नेताओं ने राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है.
8. फसल बीमा योजना में बदलाव: इसके साथ ही मौजूदा फसल बीमा योजना में बदलाव कर उसे किसान हितैषी बनाने की मांग की गई है.
9. बीज और बिजली बिल पर भी रखी मांग: किसानों ने कहा कि बीज बिल और विद्युत संशोधन बिल में किसानों से जुड़े किसी भी प्रावधान को उनकी व्यापक सहमति के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए.
10. किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की मांग: इसके अलावा किसान आंदोलनों के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की मांग भी की गई है. बैठक के दौरान किसानों की इन मांगों पर सकारात्मक चर्चा होने की बात कही गई. किसान नेताओं ने उम्मीद जताई कि सरकार इन मुद्दों पर जल्द ठोस कदम उठाएगी.
केंद्र सरकार और किसानों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बीच केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब रात 11 बजे तक बैठक चली. बैठक में किसानों की मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर अलग-अलग मंत्रियों से बात की जाएगी और उन्हें जल्द पूरा करने की कोशिश की जाएगी. वहीं, किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की ओर से इस बार सकारात्मक जवाब मिला है, लेकिन किसान तभी आंदोलन खत्म करेंगे, जब उनकी मांगें पूरी होंगी.
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