गुजरात में कम बारिश से बढ़ी चिंतागुजरात में इस साल कम बारिश वाले इलाकों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. गुजरात कांग्रेस ने राज्य के उन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है, जहां इस मौसम में बारिश काफी कम हुई है. कांग्रेस का कहना है कि बारिश की कमी से किसान परेशान हैं और उन्हें तुरंत राहत देने की जरूरत है. वहीं, राज्य सरकार ने कहा है कि प्रभावित इलाकों में लोगों और पशुओं के लिए पीने के पानी और चारे की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी.
गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट की बैठक हुई. बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि कच्छ, देवभूमि द्वारका और जामनगर में कम बारिश की स्थिति पर चर्चा की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार इस स्थिति को लेकर गंभीर है और सभी संबंधित विभागों को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं.
उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, कम बारिश वाले इलाकों में लोगों को पर्याप्त पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा. इसके साथ ही पशुओं के लिए चारे की कमी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इन जिलों के प्रभारी मंत्रियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं.
वहीं, इससे पहले गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बारिश की कमी के कारण कई इलाकों में किसान मुश्किल में हैं, लेकिन सरकार दूसरे कामों में व्यस्त है. कांग्रेस ने सौराष्ट्र और उत्तरी गुजरात के उन जिलों को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है, जहां बारिश बहुत कम हुई है. पार्टी ने प्रभावित किसानों के कर्ज और बिजली बिल माफ करने की मांग भी की है.
इसके अलावा कांग्रेस ने पशुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था करने की मांग रखी है. पार्टी का कहना है कि कम बारिश वाले इलाकों में हर सात किलोमीटर पर चारा वितरण केंद्र और गौशालाएं शुरू की जानी चाहिए, ताकि किसानों और पशुपालकों को परेशानी न हो. कांग्रेस ने कम बारिश वाले गांवों में तुरंत राहत कार्य शुरू करने की भी मांग की है. अब सरकार की ओर से पानी और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रभावित इलाकों में किसानों और पशुपालकों को कितनी राहत मिलती है. (PTI)
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