भीषण बाढ़ से बिहार में अलर्टनेपाल में आई अचानक और भीषण बाढ़ के मद्देनजर बिहार सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कृषि विभाग के अधिकारियों को पूरी तरह मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है. खास तौर पर नेपाल सीमा से जुड़े जिलों और गंडक नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थिति की लगातार निगरानी रखने को कहा गया है, ताकि संभावित जल प्रवाह से किसानों की फसल और आजीविका को नुकसान ना पहुंचे.
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि नेपाल से आने वाले पानी से गंडक समेत अन्य नदियों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है. इसलिए सीमावर्ती और नदी किनारे के जिलों में कृषि अधिकारी लगातार क्षेत्र भ्रमण करें और स्थिति का जायजा लें. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट नहीं देखनी है, बल्कि खुद गांवों में जाकर किसानों से बात करनी है. किसी भी सूचना या जलस्तर में बदलाव को गंभीरता से लिया जाए और बिना देरी के कार्रवाई की जाए.
कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में फसलों और कृषि परिसंपत्तियों की निरंतर निगरानी रखी जाए. बीज, उर्वरक और कृषि यंत्रों का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को तुरंत मदद मिल सके. बाढ़ की स्थिति बनने पर फसल क्षति का त्वरित आकलन कर विभाग को रिपोर्ट भेजी जाए, जिससे प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता जल्द दी जा सके. जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन तंत्र के साथ समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया.
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसान संकट की घड़ी में अकेला महसूस ना करें. यह सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हर किसान तक सूचना और सहायता पहुंचे. अधिकारियों को कहा गया कि किसानों को संभावित बाढ़ से बचाव के उपाय और उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी समय रहते दी जाए. प्राकृतिक आपदा का सामना केवल कागजी व्यवस्था से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और तत्परता से किया जाता है. एक-एक किसान की चिंता विभाग की चिंता है.
किसान किसी भी सहायता या जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर 1800-180-1551 पर संपर्क कर सकते हैं. कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी. उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि सतर्कता, समन्वय और संवेदनशीलता को अपना मूल मंत्र बनाकर काम करें. कृषि विभाग को किसानों का मजबूत सहारा बनना है, ताकि बाढ़ जैसी आपदा में कोई किसान अकेला ना रहे.
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