Karnataka: विरोध के बावजूद पीछे नहीं हटी सरकार, 4000 एकड़ जमीन अधिग्रहण पर बढ़ा विवाद

Karnataka: विरोध के बावजूद पीछे नहीं हटी सरकार, 4000 एकड़ जमीन अधिग्रहण पर बढ़ा विवाद

कर्नाटक सरकार ने किसानों के विरोध के बावजूद बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए चार और गांवों में करीब 4,000 एकड़ जमीन अधिग्रहण का अंतिम नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसके साथ ही नौ में से सात गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है. वहीं, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने आश्वासन दिया है कि किसी भी किसान की जमीन जबरदस्ती नहीं ली जाएगी

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Karnataka: विरोध के बावजूद पीछे नहीं हटी सरकार, 4000 एकड़ जमीन अधिग्रहण पर बढ़ा विवादबिदादी टाउनशिप मामले में किसानों ने किया था विरोध प्रदर्शन (Photo: ITG)

किसानों के लगातार विरोध के बावजूद, कर्नाटक सरकार ने प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए चार और गांवों में लगभग 4,000 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने का अंतिम नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस नोटिफिकेशन में बन्निगेरे, गोलरपाल्या, अराललासंद्रा और होसुर गांव शामिल हैं. यह फैसला उस घटना के दो दिन बाद आया है जिसमें जमीन का सर्वे कर रहे अधिकारियों पर प्रदर्शनकारी किसानों ने कथित तौर पर हमला किया और बाद में सरकार ने कई किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई.

इससे पहले, सरकार ने पहले चरण में तीन गांवों में 518 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया था. प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट नौ गांवों में फैला हुआ है. ताजा नोटिफिकेशन के साथ, नौ में से सात गांवों के लिए जमीन अधिग्रहण का अंतिम नोटिफिकेशन जारी हो चुका है, जिससे पता चलता है कि किसानों के लगातार विरोध के बावजूद सरकार इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है.

सीएम शिवकुमार ने किसानों को दिलाया भरोसा

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को साफ तौर पर भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए किसी भी किसान की जमीन जबरदस्ती नहीं ली जाएगी. उन्होंने कहा कि जो जमीन-मालिक अपनी जमीन नहीं देना चाहते, वे खेती जारी रखने के लिए आजाद हैं. विधान सौध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट के इतिहास से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड पेश किए और कहा कि सरकार किसी भी किसान को जमीन छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करेगी.

शिवकुमार ने कहा, "जो लोग अपनी जमीन नहीं देना चाहते, वे खेती जारी रख सकते हैं. जो लोग इच्छुक हैं, वे अपनी मर्जी से सरकार को जमीन सौंप सकते हैं और मुआवजा ले सकते हैं. लेकिन जमीन का एक भी 'गुंटा' हिस्सा जबरदस्ती नहीं लिया जाएगा."

प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कमेटी बिदादी टाउनशिप के लागू होने की प्रक्रिया की जांच करेगी और इसके फायदों और चिंताओं पर राय लेगी. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जो किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते, उनकी जमीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. कमेटी की रिपोर्ट सरकार के अगले फैसले का आधार बनेगी, जिसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा.

मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं-डीके शिवकुमार

मंगलवार को बिदादी में जमीन के सर्वे के दौरान हुई हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए शिवकुमार ने कहा कि इस घटना से उन्हें दुख हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक उकसावे के कारण अधिकारियों पर हमला किया गया और कुछ लोगों ने किसानों को गुमराह किया. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि बिदादी टाउनशिप उनका "ड्रीम प्रोजेक्ट" नहीं है और कहा कि उन्होंने कभी भी इस विचार पर अपना मालिकाना हक नहीं जताया और न ही इसकी आधारशिला रखी.

उन्होंने कहा, "यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं है. मैंने कभी इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं कहा और न ही मैं इसके आर्किटेक्ट के तौर पर याद किया जाना चाहता हूं. मैं बस पिछली सरकारों द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा हूं."(नागार्जुन का इनपुट)

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