Odisha farmer challengesओडिशा में सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. इसके तहत सरकारी योजनाएं चलाई जा रही है और किसानों को इस योजना से जोड़ा जा रहा है. साथ ही उन्हें खेती करने के लिए पैसों की दिक्कत नहीं हो इसलिए उन्हें ब्याज फ्री लोन भी दिया जाता है. किसानों को ब्याज मुक्त देने का फैसला ओडिशा कैबिनेट की तरफ से लिया गया था. इतना ही नहीं ओडिशा में किसानों के लिए संचालित इस योजना 'ब्याज सब्सिडी-अनुदान' के कार्यान्वयन के लिए 5700 करोड़ रुपये की राशि भी जारी की गई है. इसके तहत राज्य के किसानों को एक लाख रुपये तक ब्याजद मुक्त लोन दिया जाता है.
ब्याज मुक्त लोन देने के लिए बनाए गए नियमों के अनुसार जो किसान एक लाख से तीन लाख रुपये तक का कृषि लोन लेंगे उनसे 2 प्रतिशत का ब्याज लिया जाएगा. यह दरें एक अप्रैल 2022 से पहले कृषि लोन लेने वाले किसानों पर भी लागू होगी. इससे पहले, किसानों के लिए राज्य के प्रमुख कार्यक्रम कालिया (आजीविका और आय संवर्धन के लिए कृषक सहायता) के तहत 50000 रुपये की सीमा तक ब्याज मुक्त फसल ऋण प्रदान किया गया था.
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वर्ष 2022-23 के दौरान, लगभग 32.43 लाख छोटे और सीमांत किसानों ने सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) से 0% प्रति वर्ष ब्याज दर पर 1 लाख रुपये तक या उससे कम का फसल ऋण लिया. सरकार द्वारा निर्धारित फसल ऋण को जारी करने में शामिल सहकारी बैंकों और पैक्स को हुए नुकसान की भरपाई के लिए, राज्य सहकारी बैंकों और पैक्स को ब्याज सब्सिडी या सबवेंशन प्रदान कर रहा है. किसानों को किफायती दरों में समय-समय पर पर्याप्त लोन मिल जाए यह सुनिश्चित करने के लिए सहकारी बैंकों या पैक्स को ब्याज सब्सिडी-अनुदान योजना 2023-24 से 2027-28 तक पांच वर्षों तक लागू रहेगा. ओडिशा एक कृषि प्रधान राज्य है. यहां पर किसानों को राहत पहुंचाने के लिए इस तरह की योजना बेहगद जरूरी है.
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द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार सहकारी बैंकों ने वर्ष 2000-01 में 6.40 लाख किसानों को 438.36 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 438.36 करोड़ रुपये तक फसल ऋण वितरण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. वर्ष 2022-23 में 34.57 लाख किसानों को 16683.57 करोड़ रुपये वर्तमान में सहकारी समितियां राज्य में वितरित कुल फसल ऋण का लगभग 55% प्रदान करती हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 17% है. अधिकारियों ने कहा कि किसानों को सस्ती दर पर पर्याप्त और परेशानी मुक्त ऋण की उपलब्धता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है.
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